NHRC: National Human Rights Commission ने आगामी भारत की जनगणना में ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमेन’ और ‘ट्रांसविमेन’ जैसी अलग श्रेणियों को शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग ने मंगलवार को जारी अपनी नई सलाह रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स समुदाय के अधिकारों, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। आयोग का मानना है कि समाज में जेंडर विविधता को उचित पहचान और अधिकार दिलाने के लिए सरकारी नीतियों और कानूनों में बदलाव जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार, विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों को विस्तृत सुझाव भेजे गए हैं।
जनगणना में अलग श्रेणी बनाने की सिफारिश
एनएचआरसी ने कहा कि देश की जनगणना में ट्रांसजेंडर समुदाय की अलग और स्पष्ट पहचान होना जरूरी है। आयोग ने सुझाव दिया कि ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमेन’ और ‘ट्रांसविमेन’ जैसी श्रेणियों को अलग रूप से शामिल किया जाए, ताकि इस समुदाय की वास्तविक संख्या और सामाजिक स्थिति का सही आकलन हो सके। आयोग के अनुसार, राष्ट्रीय डाटा प्रणाली में जेंडर विविधता को शामिल करने से सरकार को योजनाएं बनाने और कल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
NHRC: शिक्षा और परिवार से जुड़े अधिकारों पर जोर
आयोग ने अपनी सलाह में कहा कि ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के संपत्ति, उत्तराधिकार, आवास और पारिवारिक अधिकार मिलने चाहिए। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर प्रवेश देने की सिफारिश भी की गई है। एनएचआरसी ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों समेत कई कानूनों की समीक्षा करने की जरूरत बताई है, ताकि स्व-पहचाने गए जेंडर को कानूनी मान्यता मिल सके।
कई मंत्रालयों और राज्यों को भेजी गई सलाह
यह सलाह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, गृह, कानून एवं न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और श्रम मंत्रालय समेत 11 मंत्रालयों को भेजी गई है। इसके अलावा भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भी यह रिपोर्ट भेजी गई है। आयोग ने सभी संबंधित विभागों से दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
NHRC: ट्रांसजेंडर समुदाय अब भी झेल रहा चुनौतियां
एनएचआरसी ने कहा कि सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण कानून और विभिन्न योजनाएं लागू किए जाने के बावजूद यह समुदाय अब भी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।आयोग ने कार्यस्थलों पर समावेशिता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने, विविध जेंडर पहचान वाले बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की देखभाल पर भी विशेष जोर दिया है। साथ ही ‘गरिमा गृह’ आश्रय केंद्रों को मजबूत करने की सिफारिश भी की गई है।








