NTA PAPER PROCESS: UGC-NET के तीन विषयों के प्रश्नपत्र में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर NTA का प्रश्नपत्र तैयार करने का पूरा सिस्टम क्या है और इसमें कितने स्तर पर जांच होती है?
पांच गुना ज्यादा सवालों से तैयार होता है प्रश्न बैंक
NTA की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। सबसे पहले प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों से क्वेश्चन बैंक तैयार कराया जाता है। इसमें परीक्षा में जरूरी प्रश्नों की संख्या से करीब पांच गुना ज्यादा सवाल रखे जाते हैं। विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि इनमें से कौन-से सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किए जाएंगे।
NTA PAPER PROCESS: अलग-अलग चरणों में बदल जाते हैं एक्सपर्ट
प्रश्न बैंक तैयार होने के बाद इसे मॉडरेटरों को दिया जाता है। मॉडरेटर अलग-अलग सेट के लिए प्रश्नों का चयन करते हैं और यह जांचते हैं कि पूरे सिलेबस को पर्याप्त रूप से कवर किया गया है या नहीं। साथ ही प्रश्नों के उत्तरों की शुद्धता की भी जांच की जाती है। प्रक्रिया में अलग-अलग चरणों के लिए अलग विशेषज्ञ रखे जाते हैं, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न हो।
प्रश्नपत्र का दोबारा होता है रिव्यू
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे विशेषज्ञों से हल कराया जाता है। उनके उत्तरों का मॉडरेटरों द्वारा तैयार उत्तरों से मिलान किया जाता है। अगर दोनों में अंतर मिलता है तो संबंधित प्रश्न की दोबारा समीक्षा की जाती है। इसके लिए मॉडरेटर और पुनरीक्षकों के बीच चर्चा होती है और जरूरत पड़ने पर प्रश्न या उत्तर में सुधार किया जाता है।
NTA PAPER PROCESS: 13 भाषाओं में होता है अनुवाद
NTA कई परीक्षाएं अलग-अलग भाषाओं में आयोजित करता है। प्रश्नपत्र के अनुवाद के बाद उसकी दोबारा जांच की जाती है। अनुवाद को दूसरी भाषा में और फिर वापस अंग्रेजी में ट्रांसलेट कराकर भी क्रॉस-चेक किया जाता है। अब अनुवाद प्रक्रिया में AI टूल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, हालांकि AI से तैयार अनुवाद की मानवीय स्तर पर दोबारा जांच की जाती है। पेपर तैयार करने और अनुवाद के संवेदनशील चरणों में इंटरनेट और निजी डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहता है।
पेपर सेट करने वाले पैनल भी अलग-अलग
प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए वरिष्ठ फैकल्टी के अलग-अलग पैनल बनाए जाते हैं। प्रत्येक पैनल में एक कन्वेनर और चार विशेषज्ञ होते हैं। इन विशेषज्ञों के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस जमा करा लिए जाते हैं। सभी पैनल अलग-अलग काम करते हैं और एक-दूसरे द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों की जानकारी उन्हें नहीं होती। इसके बाद रैंडमाइजेशन के जरिए प्रश्नों का चयन किया जाता है।
NTA PAPER PROCESS: प्रिंटिंग से पहले भी होती है जांच
पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रश्नपत्र प्रिंटिंग और पैकिंग के लिए भेजा जाता है। जानकारों के मुताबिक, इतने स्तर की जांच के बावजूद कभी-कभी टाइपो जैसी गलतियां रह जाती हैं। इसकी जिम्मेदारी प्रूफरीडिंग करने वाले स्टाफ की होती है। अगर अंतिम चरण में भी किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो प्रश्नपत्र के सेट बदले जा सकते हैं। पेपर सेट का अंतिम निर्णय परीक्षा वाले दिन सुबह लिया जाता है और इसके बाद प्रश्नपत्रों को सील किया जाता है।
सिस्टम पर फिर क्यों उठ रहे सवाल?
UGC-NET के कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। जब प्रश्नपत्र कई स्तरों पर विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और पुनरीक्षकों की जांच से गुजरता है, तो इसके बावजूद गलतियां कैसे रह जाती हैं अब यही बड़ा सवाल है।
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