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Odisha Textbook Row: ओडिशा में टेक्स्टबुक विवाद पर CJP ने सरकार को घेरा

Odisha Textbook Row:

Odisha Textbook Row: ओडिशा में स्कूल की टेक्स्टबुक में कथित गलतियों को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने सोमवार को भुवनेश्वर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों का समर्थन किया। उन्होंने टेक्स्टबुक की छपाई और वितरण को लेकर राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

Odisha Textbook Row: 380 करोड़ रुपये की छपाई पर उठे सवाल-

सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्कूल के बच्चों के लिए टेक्स्टबुक की छपाई पर करीब 380 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इन किताबों में कई गलतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और संशोधित किताबें छात्रों तक जल्द पहुंचाई जानी चाहिए। वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से कहा गया है कि किताबों में जरूरी सुधार किए जा रहे हैं और संशोधित किताबों का वितरण शुरू हो चुका है।

Odisha Textbook Row: छात्रों के आंदोलन को CJP का समर्थन-

CJP ने नव निर्माण युवा छात्र संगठन (NYCS) के चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है। संगठन स्कूल शिक्षा में सुधार और टेक्स्टबुक में कथित गलतियों को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी इस मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। CJP के सौरव दास ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनके आंदोलन के समर्थन की बात कही। छात्रों की ओर से ओडिशा विधानसभा का घेराव करने की भी घोषणा की गई है।

राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भी बोले सौरव दास-

सौरव दास ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा बेरोजगारी और सरकारी पदों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं। दास ने युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताते हुए कहा कि रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के युवाओं तक पहुंचने के कार्यक्रम का स्वागत भी किया।

मामले पर आगे भी जारी रह सकता है विवाद-

ओडिशा में टेक्स्टबुक की गलतियों को लेकर छात्रों और राजनीतिक संगठनों का विरोध जारी है। वहीं, सरकार का कहना है कि जरूरी सुधार किए जा रहे हैं और संशोधित किताबें छात्रों तक पहुंचाई जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है

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