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संसद प्रदर्शन पर टीकमगढ़ में संत समाज का विरोध, पप्पू यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग

Pappu Yadav

Pappu Yadav: संसद परिसर में साधु के वेश में किए गए सांकेतिक प्रदर्शन का विवाद अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। टीकमगढ़ में निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज ने साधु-संतों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सांसद पप्पू यादव के प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताई। संत समाज ने इसे सनातन परंपरा और साधु समाज का अपमान बताते हुए पप्पू यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है।

टीकमगढ़ में संत समाज का तीखा विरोध

धजरई हनुमान मंदिर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि साधु-संतों का वेश भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतीक है, जिसका राजनीतिक प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों और साधु वेश का दुरुपयोग किया गया है। संत समाज ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं और भविष्य में इन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Pappu Yadav: लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की उठी मांग

महंत सीताराम दास महाराज ने मांग की कि सांसद पप्पू यादव की लोकसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए। साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजने की भी मांग रखी गई। संत समाज का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण में संवैधानिक मर्यादाओं के साथ धार्मिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे गलत संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

क्या था संसद परिसर का पूरा मामला?

शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी के आरोपों को लेकर एक सांकेतिक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया था। इस प्रदर्शन में पप्पू यादव साधु और पुजारी के वेश में नजर आए। उनके सामने दानपेटी रखी गई थी, जिसमें अन्य विपक्षी सांसद श्रद्धालु बनकर पैसे डालते दिखे। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव को प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी से पैसे अपनी जेब में रखते हुए दिखाया गया, जबकि एक अन्य सांसद ने श्रद्धालु की भूमिका निभाते हुए इस पर आपत्ति जताई। इस प्रदर्शन का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं का विरोध बताना था, लेकिन इसके बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ संत समाज ने भी इसे धार्मिक प्रतीकों के अपमान से जोड़ते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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