Vikas Dubey: कानपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात पुलिस टीम कुख्यात अपराधी विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, टीम पर घात लगाकर हमला किया गया और ताबड़तोड़ फायरिंग में डिप्टी एसपी समेत 8 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इस घटना के बाद विकास दुबे और उसके साथियों की तलाश तेज हुई। मामले ने पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा की और पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
उज्जैन में गिरफ्तारी और फिर एनकाउंटर
बिकरू कांड के बाद फरार विकास दुबे को 9 जुलाई 2020 को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया। इसके अगले दिन यानी 10 जुलाई को उसे पुलिस टीम कानपुर ला रही थी। पुलिस के अनुसार, कानपुर पहुंचने से पहले वाहन पलटने के बाद विकास दुबे ने पुलिस की पिस्टल छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में वह घायल हुआ और उसकी मौत हो गई।
Vikas Dubey: फिर 6 साल तक डेथ सर्टिफिकेट क्यों नहीं बना?
यहीं से इस मामले का नया पेच सामने आया। विकास दुबे की मौत के बाद तैयार किए गए सरकारी दस्तावेजों में उसके पिता के नाम को लेकर गलती हो गई। रिकॉर्ड में पिता का नाम रामकुमार दुबे की जगह राजकुमार दुबे दर्ज हो गया। पंचायतनामा और बाद के बॉडी डिस्पोजल संबंधी रिकॉर्ड में भी यही नाम दर्ज होने की बात सामने आई। इसी रिकॉर्ड में अंतर के कारण नगर निगम स्तर पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अटक गई।
परिवार हाईकोर्ट तक क्यों पहुंचा?
विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नगर निगम, पोस्टमार्टम हाउस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करती रहीं। रिपोर्टों के मुताबिक, पिता के नाम में दर्ज गलती को ठीक कराने के लिए अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिए गए। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो परिवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद कानपुर के सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पुराने रिकॉर्ड की जांच की।
Vikas Dubey: पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए, अब जारी हुआ प्रमाणपत्र
हाईकोर्ट की कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने पंचायतनामा रजिस्टर, पोस्टमार्टम से जुड़े दस्तावेज, बॉडी डिस्पोजल स्लिप और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। जांच के बाद पिता के नाम से जुड़ी गलती को दुरुस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके बाद सितंबर 2026 में विकास दुबे का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रमाणपत्र कानपुर नगर निगम की ओर से जारी हुआ। इस तरह 10 जुलाई 2020 की मौत के करीब छह साल बाद उसकी मृत्यु आधिकारिक दस्तावेजों में भी दर्ज हो सकी।
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