Paraquat Dichloride Ban: किसानों की थाली और खेत, दोनों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने खरपतवारनाशक पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर तत्काल प्रभाव से पूरे देश में प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पैराक्वाट डाइक्लोराइड को मेडिकल एक्सपर्ट्स सबसे खतरनाक रसायनों में गिनते हैं। इसके संपर्क में आने या गलती से निगलने पर फेफड़े तेजी से खराब होने लगते हैं। लिवर और किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसका कोई एंटीडोट दुनिया में मौजूद नहीं है।सरकार के अनुसार, इस केमिकल का सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल मूंग की फसल में हो रहा था। नियमों के तहत इसे सिर्फ चाय, आलू, कपास, रबर, कॉफी, धान, गेहूं, मक्का और अंगूर जैसी 9 फसलों में उपयोग की अनुमति थी। लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किसान कटाई से पहले मूंग को जल्दी सुखाने के लिए इसका छिड़काव कर रहे थे। नतीजा यह हुआ कि दाल के जरिए यह जहर सीधे हमारी थाली तक पहुंचने लगा।

कंपनियों और डीलरों के लिए नए आदेश
नए आदेश के बाद पैराक्वाट का आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन और इस्तेमाल पूरी तरह बंद होगा। जिन कंपनियों और डीलरों के पास रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या स्टॉक है, उन्हें 3 महीने के भीतर उसे रजिस्ट्रेशन कमेटी को वापस करना होगा। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। राज्य सरकारों को सख्त जांच, औचक निरीक्षण और केस दर्ज करने के अधिकार दिए गए हैं।यह केमिकल 1882 में डाई के तौर पर बना था और 1962 में हर्बिसाइड के रूप में बाजार में आया। स्विट्जरलैंड ने 1989 में, ऑस्ट्रिया ने 1993 में, ब्रिटेन ने 2007 में और चीन ने 2017 में इसे बैन कर दिया। हैरानी की बात है कि इन्हीं देशों की कंपनियां इसे बनाकर भारत जैसे देशों में बेच रही थीं।
अभी यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। सरकार ने किसानों, कंपनियों और आम लोगों से 30 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। अंतिम फैसला इसके बाद लागू होगा।संक्षेप में, यह बैन फसल को नुकसान पहुंचाने वाले खरपतवार के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारी सेहत और पर्यावरण को बचाने के लिए उठाया गया जरूरी कदम है।
Written by- Mansi Sharma
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