Pilibhit DIOS Office Scam: यह मामला जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं। एक साधारण चपरासी के नाम पर करोड़ों का खेल चल रहा था, और लंबे समय तक किसी को भनक तक नहीं लगी। नीचे पूरी कहानी को आसान और स्पष्ट भाषा में समझिए—बिना किसी जानकारी को छोड़े।
कैसे एक चपरासी बना करोड़ों का मास्टरमाइंड?
पीलीभीत का इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी सरकारी रिकॉर्ड में एक चपरासी था, लेकिन उसकी जिंदगी और कामकाज किसी अफसर से कम नहीं थे। वह इतना चालाक था कि शिक्षा विभाग के करीब 9 करोड़ रुपए गबन कर गया और किसी को पता तक नहीं चला।
जब मामला सामने आया तो उसके खिलाफ FIR दर्ज हुई। लेकिन इलहाम पहले ही कोर्ट से अग्रिम जमानत लेकर घर आ चुका था। जांच में खुलासा हुआ कि उसने अपनी तीन पत्नियों और कई रिश्तेदारों के बैंक खातों में सरकारी पैसा ट्रांसफर किया था। हैरानी की बात यह भी थी कि किसी को उसकी कई शादियों के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी।

अधिकारियों से करीबी और सिस्टम में पकड़
इलहाम पीलीभीत के पंजाबियान मोहल्ले में रहता था। 2010 के आसपास उसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिली थी और उसकी पोस्टिंग बीसलपुर के एक कॉलेज में हुई थी। नौकरी के बाद उसने अर्शी खातून से शादी की।
धीरे-धीरे उसने शिक्षकों और अधिकारियों से अच्छे संबंध बना लिए। इसी का फायदा उठाकर 2014 में उसने खुद को DIOS ऑफिस में अटैच करवा लिया। वहां भी उसकी पोस्ट चपरासी की ही थी, लेकिन समय के साथ वह बाबुओं का खास बन गया और सिस्टम की अंदरूनी जानकारी हासिल कर ली।
Pilibhit DIOS Office Scam: कंप्यूटर की जानकारी से मिला बड़ा फायदा
2018 के बाद जब ऑफिस का काम डिजिटल होने लगा, तो इलहाम की भूमिका और मजबूत हो गई। जहां दूसरे कर्मचारी कंप्यूटर में कमजोर थे, वहीं इलहाम को इसकी अच्छी समझ थी।
इसी वजह से उसे सैलरी बिल बनाना, टोकन जनरेट करना जैसे अहम वित्तीय काम दे दिए गए। उसके पास जिले के दर्जनों स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड रहता था। जरूरत पड़ने पर शिक्षक भी उसी से संपर्क करते थे।

तीन शादियां, लेकिन किसी को खबर नहीं
इलहाम ने पहली शादी के बाद 2016 में अजारा खान से दूसरी शादी की। फिर संभल की लुबना से तीसरी शादी कर ली।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसकी पत्नियों को भी एक-दूसरे के बारे में जानकारी नहीं थी। लुबना ने पुलिस को बताया कि उसे इलहाम की बाकी शादियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।इतना ही नहीं, उसने अपनी साली और अन्य रिश्तेदारों से भी करीबी बढ़ाई और उनके खातों का इस्तेमाल किया।
फर्जी टीचर बनाकर खातों में भेजा पैसा
इलहाम ने एक बड़ा खेल खेला। उसने अपनी पत्नी अर्शी का बैंक खाता खुलवाकर उसे “सैलरी अकाउंट” बनवा दिया। इसके लिए जरूरी वेरिफिकेशन और अधिकारियों के साइन भी उसने मैनेज कर लिए।इसके बाद उस खाते में हर महीने सैलरी के नाम पर पैसे आने लगे। फरवरी 2026 तक इस खाते में 1.15 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा हो चुके थे।
इसी तरह उसने अपनी बाकी पत्नियों, साली, सास और अन्य महिलाओं के खातों को भी सरकारी टीचर दिखाकर जोड़ दिया, जबकि उनका शिक्षा से कोई संबंध नहीं था।

ट्रेजरी से बार-बार पैसा आने पर हुआ शक
12 सितंबर 2024 से यह खेल शुरू हुआ, जब पहली बार अर्शी के खाते में ट्रेजरी से पैसा आया। इसके बाद हर महीने कई बार पैसे ट्रांसफर होते रहे।17 दिसंबर 2025 तक 98 बार पैसे ट्रांसफर हुए और कुल रकम 1 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई। लगातार इतनी बड़ी रकम आने पर बैंक को शक हुआ, क्योंकि यह एक सामान्य बचत खाता था।10 फरवरी 2026 को बैंक ने इस बारे में जिलाधिकारी को सूचना दी।
जांच शुरू, सस्पेंशन और गिरफ्तारी
जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच शुरू हुई। DIOS ने 13 फरवरी को इलहाम को सस्पेंड कर दिया और उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई।बाद में पुलिस ने उसकी पत्नी अर्शी को गिरफ्तार किया, हालांकि वह भी जमानत पर बाहर आ गई।
जांच में सामने आया कि इलहाम ने सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि कुल 53 फर्जी खाते बना रखे थे। इन खातों में करीब 8.15 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 5.5 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए।इलहाम ने ज्यादातर पैसे महिलाओं के खातों में ही भेजे, क्योंकि उसे लगता था कि उनका वेरिफिकेशन आसान होता है।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए
- एक चपरासी को इतना बड़ा वित्तीय काम कैसे मिला?
- अधिकारियों ने बिना जांच के साइन कैसे कर दिए?
- ट्रेजरी ने बढ़ते बजट पर सवाल क्यों नहीं उठाया?
- क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं?
ट्रेजरी अधिकारियों का कहना है कि उनका काम सिर्फ बिल प्रोसेस करना है, जांच की जिम्मेदारी DIOS ऑफिस की होती है।








