POK: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के चौबीसवें दिन रावलाकोट में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए। आंदोलनकारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है।
जनसभा में सेना पर लगाए गए गंभीर आरोप
रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमन खान ने दावा किया कि जिन कश्मीरियों को आज आतंकवादी कहा जा रहा है, उन्हें हथियार स्वयं पाकिस्तान की सेना ने उपलब्ध कराए थे। उन्होंने कहा कि अब उन्हीं लोगों को आतंकवादी बताकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस बयान पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन जताया और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
POK: प्रशासन और प्रतिबंधित संगठन पर भी उठे सवाल
सभा के दौरान अमन खान ने आरोप लगाया कि पाँच फरवरी को रावलाकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रशासन ने एक प्रतिबंधित संगठन को खुली छूट दी थी। उन्होंने दावा किया कि उस कार्यक्रम के दौरान हथियारबंद लोग खुलेआम शहर में घूमते रहे और प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई। इन आरोपों के बाद आंदोलनकारियों ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
सरकार को दी गई आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि उनकी अड़तीस मांगों को बातचीत के माध्यम से स्वीकार किया जाए। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे। उनका कहना है कि सरकार की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन केवल मांगों तक सीमित नहीं रहेगा और उसका दायरा और बढ़ेगा।
POK: आंदोलन ले रहा है राजनीतिक स्वरूप
लगातार चौबीस दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। रावलाकोट की विशाल जनसभा ने संकेत दिया है कि आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक रूप ले रहा है। आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो भविष्य में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को लेकर भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।








