Pooja pal: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (सपा) से निष्कासित की गईं विधायक पूजा पाल को अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। यह फैसला यूपी की राजनीति में एक नए सियासी समीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
संघर्ष, दर्द और राजनीति की लंबी कहानी
पूजा पाल की जिंदगी संघर्ष और त्रासदी से भरी रही है। प्रयागराज की रहने वाली पूजा का जीवन उस वक्त पूरी तरह बदल गया, जब शादी के महज 9 दिन बाद उनके पति राजू पाल की हत्या कर दी गई। इस घटना ने उन्हें मजबूरी में राजनीति के मैदान में उतार दिया। शुरुआत में राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं रखने वाली पूजा पाल ने अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभाला और चुनावी मैदान में उतरीं।
Pooja pal: पति के हत्यारे से पहला चुनाव हार
2005 के उपचुनाव में पूजा पाल को अपने पति के कथित हत्यारे से करारी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष जारी रखा। मेहनत और जनता के बीच सक्रियता का नतीजा यह रहा कि 2007 के चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद 2012 में भी उन्होंने मजबूत प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर जीत दर्ज की और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
Pooja pal: उतार-चढ़ाव से भरा राजनीतिक सफर
2017 में पूजा पाल को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और इसके बाद उनके राजनीतिक जीवन में कई बदलाव देखने को मिले। 2018 में उन्हें बसपा से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने 2019 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर उन्होंने चायल सीट से जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
अतीक अहमद केस के बाद बदला राजनीतिक रुख
2024 में प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड के बाद पूजा पाल का राजनीतिक रुख बदलने लगा। इसके बाद उन्होंने सपा से दूरी बनानी शुरू कर दी और भाजपा के समर्थन में नजर आईं। सदन में भी उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ की तारीफ करते हुए कहा था कि माफिया के खिलाफ कार्रवाई से उन्हें न्याय मिला है।
सपा से निष्कासन और भाजपा में नई भूमिका
Pooja pal: 14 अगस्त 2025 को समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद अब भाजपा ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। उनके इस राजनीतिक सफर को यूपी की बदलती सियासत और नए समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है, जहां एक बार फिर पूजा पाल का नाम सुर्खियों में है।अब देखना होगा कि भाजपा में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पूजा पाल की राजनीतिक भूमिका क्या नया मोड़ लेती है।
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