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2047 का भारत कैसा होगा? दुनिया को आध्यात्मिक दिशा देगा भारत- हॉसबाले का बड़ा दावा

RSS NEWS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि भारत तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है, जहां वह आर्थिक मजबूती के साथ अपनी सभ्यतागत और आध्यात्मिक मूल्यों के जरिए दुनिया का नेतृत्व कर सके। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत न केवल भौतिक रूप से समृद्ध होगा, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी विश्व का मार्गदर्शन करेगा।

आरएसएस के 100 साल: विस्तार और प्रभाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर दिए साक्षात्कार में होसबाले ने कहा कि संगठन ने देश के हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और सामाजिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा चुनौतियों से भरी रही, लेकिन स्वयंसेवकों के समर्पण और समाज के सहयोग से संगठन लगातार आगे बढ़ा।

RSS NEWS: ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ और सामाजिक भूमिका

होसबाले के अनुसार, आरएसएस का मूल विचार अपनी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र पर गर्व करने की भावना है, जिसे ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, उद्योग, सेवा कार्यों और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

वैश्विक स्तर पर भारतीय सोच की जरूरत

उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि आज दुनिया जिन चुनौतियों वर्चस्ववाद, आतंकवाद, पर्यावरण संकट और परिवारों के विघटन से जूझ रही है, उनके समाधान में भारतीय दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने संतुलित विकास और वैश्विक सद्भाव पर जोर दिया।

RSS NEWS: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति जरूरी

होसबाले ने कहा कि भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी हासिल करनी होगी। उन्होंने ‘डिकोलोनाइजेशन’ को जरूरी बताते हुए कहा कि भारतीय इतिहास, समाज और संस्कृति को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है।

भविष्य की दिशा और ‘पंच परिवर्तन’

उन्होंने बताया कि आरएसएस अब ‘पंच परिवर्तन’- सामाजिक समरसता, परिवार, पर्यावरण-अनुकूल जीवन, राष्ट्रीय स्वाभिमान और नागरिक कर्तव्य पर विशेष ध्यान दे रहा है। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में सुधार से समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।

RSS NEWS: युवाओं के नाम संदेश

होसबाले ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमता को पहचानें, बड़े सपने देखें और सेवा की भावना के साथ देश को आगे बढ़ाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाएं, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें।

सवाल यह है…

क्या भारत 2047 तक आर्थिक शक्ति के साथ आध्यात्मिक नेतृत्व भी स्थापित कर पाएगा? क्या ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा वैश्विक राजनीति में वास्तविक रूप ले सकेगी? क्या भारत औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होकर अपनी असली पहचान स्थापित कर पाएगा?

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