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‘घायल’ बयान के बाद ‘घातक’ चाल, राघव चड्ढा के कदम से AAP को 5 बड़े झटके

7 सांसदों ने छोड़ी AAP

Raghav Chadha News: नई दिल्ली। कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने फिल्म धुरंधर का एक डायलॉग बोला था “घायल हूं, इसलिए घातक हूं।” उस समय यह सिर्फ एक डायलॉग जैसा लगा।लेकिन अब जब पीछे देखते हैं, तो इसका मतलब थोड़ा अलग लग रहा है। कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी से अलग हो गए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अपनी पार्टी बदल ली है।इस वजह से माना जा रहा है कि इससे अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है।

राघव चड्ढा के फैसले से AAP को बड़ा झटका

किसी बड़े नेता के पार्टी छोड़ने से असर तो होता है, लेकिन राघव चड्ढा के इस कदम का असर थोड़ा ज्यादा माना जा रहा है। इससे पार्टी के आंकड़ों और उसकी इमेज पर सीधा फर्क पड़ सकता है।

आम आदमी पार्टी के लिए इसका सबसे ज्यादा असर पंजाब में दिख सकता है। पंजाब ही वह राज्य है जहां पार्टी की सरकार है और यहीं से वह देश में आगे बढ़ना चाहती है। इसलिए यह स्थिति पार्टी के लिए चिंता की बात हो सकती है।

Raghav Chadha

Raghav Chadha News: आंकड़े बता रहे हैं AAP को नुकसान

राघव चड्ढा के जाने को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह सिर्फ एक नेता के जाने की बात नहीं है, बल्कि इससे पार्टी की ताकत सीधे आंकड़ों में भी कम हो गई है। कहा जा रहा है कि उनके साथ राज्यसभा के 6 और सदस्य भी अलग हो गए हैं।

पहले पार्टी के पास राज्यसभा में करीब 10 सांसद थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है। यानी पार्टी की ताकत में लगभग 70% की कमी आ गई है। इससे संसद में पार्टी की आवाज काफी कमजोर हो सकती है। बहस में हिस्सा लेना, समितियों में जगह पाना और अपनी बात को मजबूती से रखना अब मुश्किल हो सकता है।

दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होने की वजह से इस बदलाव को नियमों के तहत “विलय” माना जा सकता है, जिसका मतलब है कि यह नुकसान तुरंत और आसानी से ठीक नहीं हो पाएगा।

इसका असर इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि राज्यसभा में पार्टी की ताकत काफी हद तक पंजाब पर आधारित है। अब सांसद कम होने से पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ बनाए रखना और पंजाब के मुद्दों को मजबूती से उठाना पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है।

AAP की ‘नई राजनीति’ की इमेज को झटका

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से अलग होते हुए कहा कि उन्होंने इस पार्टी को बहुत समय दिया, लेकिन अब उन्हें लगता है कि पार्टी अपने पुराने रास्ते से भटक गई है। उनके मुताबिक, पार्टी अब देश के हित से ज्यादा अपने फायदे के बारे में सोच रही है, इसलिए उन्होंने अलग होने का फैसला लिया।

AAP की शुरुआत 2012 में अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद हुई थी। उस समय पार्टी खुद को बाकी पार्टियों से अलग बताती थी और साफ-सुथरी राजनीति की बात करती थी। इसी वजह से लोगों का भरोसा भी बना।अब राघव चड्ढा के जाने से यह बात और मुश्किल हो सकती है। उनके आरोपों के बाद लोगों का ध्यान पार्टी के वादों से हटकर उसके कामकाज पर ज्यादा जा सकता है।

इसके अलावा, शराब घोटाले को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था, जिससे पार्टी की छवि पर असर पड़ा था। ऐसे में चड्ढा का पार्टी छोड़ना आने वाले चुनावों, खासकर पंजाब में, वोटर्स की सोच को भी बदल सकता है और पार्टी के लिए चुनौती बढ़ा सकता है।

आम आदमी पार्टी में अंदर की हलचल

राघव चड्ढा और कुछ अन्य सांसदों का पार्टी छोड़ना आम आदमी पार्टी के अंदर चल रही दिक्कतों को दिखाता है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, पार्टी में पहले भी अंदरूनी मतभेद देखने को मिले हैं।

AAP की शुरुआत 2012 में भारत भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से हुई थी। उसी समय अन्ना हजारे और किरण बेदी जैसे लोग चुनाव लड़ने के फैसले से सहमत नहीं थे।

इसके बाद भी पार्टी से कई बड़े नेता अलग हो चुके हैं, जैसे योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, आशुतोष और अलका लांबा।हाल ही में स्वाति मालीवाल के साथ भी पार्टी का विवाद सामने आया था, और अब उनके भी पार्टी छोड़ने की बात कही जा रही है।

राघव चड्ढा का मामला इसलिए ज्यादा बड़ा माना जा रहा है क्योंकि एक साथ कई सांसदों के जाने से पार्टी की ताकत पर सीधा असर पड़ा है। इसे पार्टी के लिए एक बड़ी परेशानी के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब में जीत दिलाने वाले नेता ने छोड़ी पार्टी

राघव चड्ढा का जाना अहम माना जा रहा है, लेकिन संदीप पाठक का साथ में जाना पार्टी के लिए और ज्यादा असर डाल सकता है। पाठक को आम आदमी पार्टी की पंजाब जीत का बड़ा कारण माना जाता है।

उन्होंने चुनाव में डेटा और बूथ लेवल पर काम करके मजबूत रणनीति बनाई थी। इसी वजह से 2022 के चुनाव में पार्टी को करीब 42% वोट मिले और 117 में से 92 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल हुई।

अब जब भगवंत मान की सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में है और अगले साल चुनाव होने हैं, तो ऐसे में इस तरह के रणनीतिक नेता के जाने से पार्टी को कमी महसूस हो सकती है। इससे आने वाले चुनाव में पार्टी के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

राष्ट्रीय स्तर पर आम आदमी पार्टी को नुकसान

राघव चड्ढा के जाने का असर सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। पार्टी अब तक खुद को विपक्ष में एक अलग और मजबूत ताकत के रूप में पेश करती रही है, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ संतुलन बनाकर।

अब कहा जा रहा है कि यह संतुलन थोड़ा कमजोर हो सकता है। राज्यसभा में पार्टी की सीटें 10 से घटकर करीब 3 रह जाने की बात सामने आ रही है, जिससे उसकी राष्ट्रीय स्तर पर पकड़ कम हो सकती है। राजनीति में संख्या बहुत मायने रखती है, इसलिए इससे पार्टी की ताकत और प्रभाव दोनों पर असर पड़ सकता है।

पहले पार्टी मजबूत स्थिति से बातचीत करती थी, लेकिन पिछले साल दिल्ली में हार के बाद यह स्थिति पहले ही कमजोर हो गई थी। अब जब सांसदों की संख्या भी कम हो रही है, तो आगे सीट शेयरिंग या बड़े फैसलों में अपनी बात मनवाना पार्टी के लिए और मुश्किल हो सकता है।

राघव चड्ढा के भाजपा में जाने पर केजरीवाल का रिएक्शन

कभी केजरीवाल की आंखों के तारे रहे राघव चड्ढा ने आज उन्हें बड़ा झटका देते हुए भाजपा में शामिल होने का एलान कर दिया। यही नहीं, चड्ढा ने सात अन्य आप सांसदों को भी भाजपा में ले जाने की बात कही है। राघव चड्ढा के इस फैसले के बाद अब केजरीवाल का पहला रिएक्शन आया है। केजरीवाल का यह एक लाइन का रिएक्शन उनका दर्द बयां करता है।केजरीवाल ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा है, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।”

Written by- Rishika Srivastva

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