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रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की फिर नरमी! क्या भारत को छूट का मिलेगा फायदा या नहीं ?

Russian Oil: अमेरिका ने रूस के तेल पर लागू अस्थायी छूट की समयसीमा बढ़ाकर 17 जून तक कर दी है। इस फैसले से समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल की खेपें भारत समेत अन्य देशों तक पहुंचती रहेंगी। वैश्विक तेल बाजार में जारी अस्थिरता के बीच इसे भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन रूसी तेल कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि रूस के ऊर्जा निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

वैश्विक बाजार को स्थिर रखने की कोशिश

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस फैसले से ऊर्जा संकट झेल रहे देशों को राहत मिलेगी और वैश्विक कच्चे तेल बाजार को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। जरूरत पड़ने पर विशेष अनुमति भी दी जा सकती है।

Russian Oil: भारत के लिए क्यों अहम है फैसला?

भारत इस समय रूस से रियायती दरों पर सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है। इस छूट के चलते भारतीय रिफाइनरियां कम कानूनी जोखिम के साथ रूस से तेल खरीद जारी रख सकेंगी। हालांकि, बार-बार कम अवधि के लिए छूट बढ़ने से कंपनियों को लंबी अवधि की योजना बनाने में दिक्कत हो रही है। इससे तेल सौदों और जहाजों की अग्रिम व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

रूस पर बढ़ी भारत की निर्भरता

पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 22.5 लाख बैरल तेल आयात किया, जो फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुना था। रूस से आने वाला तेल अब भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है। अप्रैल में भी आयात करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन बना रहा।

Russian Oil: भारत ने क्या कहा?

भारत लगातार यह कहता रहा है कि तेल खरीद के फैसले कीमत और राष्ट्रीय जरूरतों के आधार पर किए जाते हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता था और आगे भी खरीद जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि भारत की ऊर्जा खरीद किसी एक अमेरिकी छूट पर निर्भर नहीं है।

बीमा और शिपिंग व्यवस्था में बदलाव

रूसी तेल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए भारत ने जहाज बीमा व्यवस्था में भी बदलाव किए हैं। भारतीय नौवहन महानिदेशालय ने रूसी बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी है, ताकि तेल आपूर्ति बिना रुकावट जारी रह सके।

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