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विधायक गए, पार्टी गई, सिंबल गया… अब सांसद भी! उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी राजनीतिक अग्निपरीक्षा

Shiv Sena UBT Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के सामने अब एक और बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। खबरें हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में हैं। इन अटकलों ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद शिंदे गुट में विलय की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपे जाने की भी चर्चा है। इस बीच उद्धव ठाकरे ने नई दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई, लेकिन कथित बागी सांसद उसमें शामिल नहीं हुए।

Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे का दो टूक संदेश

संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जो भी पार्टी छोड़ना चाहता है, वह जा सकता है। माना जा रहा है कि यह बयान संभावित दलबदल की अटकलों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देने की कोशिश है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ बना चर्चा का विषय

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की खूब चर्चा है। राजनीतिक हलकों में इसे एकनाथ शिंदे की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं और सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश की जा रही है।

Shiv Sena UBT Crisis: कानूनी विकल्प तलाश रही है शिवसेना UBT

राज्यसभा सांसद संजय राउत, सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। पार्टी नेताओं ने वरिष्ठ वकीलों से मुलाकात कर संभावित दलबदल की स्थिति में उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर चर्चा की है। पार्टी का कहना है कि यदि छह सांसद दल बदलते हैं तो उसके खिलाफ संवैधानिक और कानूनी उपायों पर विचार किया जाएगा।

पहले सिंबल और विधायक, अब सांसदों की चुनौती

उद्धव ठाकरे पहले ही पार्टी का चुनाव चिह्न, बड़ी संख्या में विधायक और संगठन का बड़ा हिस्सा खो चुके हैं। ऐसे में यदि सांसद भी शिंदे गुट के साथ जाते हैं तो यह शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

Shiv Sena UBT Crisis: विशेषज्ञों ने जताई चिंता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट सिर्फ एक पार्टी का नहीं बल्कि बदलती भारतीय राजनीति का संकेत भी है। कुछ विशेषज्ञ इसे संसाधनों और राजनीतिक ताकत की लड़ाई बता रहे हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के समर्थकों का कहना है कि पार्टी इस चुनौती का मुकाबला करेगी।

कार्यकर्ताओं में बढ़ी बेचैनी

दलबदल की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं में भी बेचैनी देखी जा रही है। पार्टी के भीतर नेताओं की लगातार बैठकें हो रही हैं और संगठन को एकजुट रखने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे अपने सांसदों को साथ रखने में कितने सफल होते हैं।

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