Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में मंगलवार सुबह प्रशासन ने मस्जिद और मदरसे के अवैध हिस्से के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन के मुताबिक, करीब 14 हजार वर्गफीट में बने परिसर का 9 हजार वर्गफीट हिस्सा सरकारी जमीन पर था, जिसे कब्जामुक्त कराने के लिए छह बुलडोजरों की मदद से करीब दो घंटे तक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया।
कार्रवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के नेताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। डुमरियागंज की सपा विधायक सैय्यदा खातून, पार्टी जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई स्थल से दूर किया।
सुबह सात बजे शुरू हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब सात बजे डुमरियागंज एसडीएम विवेकानंद मिश्र, डुमरियागंज सीओ बृजेश वर्मा और बांसी सीओ सिवेंदु सिंह की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। सुरक्षा के लिए पांच थानों की पुलिस और करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
Siddharthnagar News: एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने दी जानकारी
एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने बताया कि 14 हजार वर्गफीट क्षेत्र में सात दुकानें, 12 कमरे, मस्जिद और मदरसा बना था। रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 5 हजार वर्गफीट जमीन निजी थी, जबकि 9 हजार वर्गफीट जमीन सरकारी रिकॉर्ड में खेल के मैदान के रूप में दर्ज है। प्रशासन ने इसी हिस्से को अतिक्रमण मानते हुए कार्रवाई की। कार्रवाई में सरकारी जमीन पर बने एक दुकान, सात कमरे, मस्जिद और मदरसे के करीब आधे हिस्से को ढहा दिया गया। निजी जमीन पर बने पांच कमरे तथा मस्जिद-मदरसे के शेष हिस्से को नहीं तोड़ा गया।
400 बच्चे करते थे पढ़ाई
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आरबिया जियाउल उलूम मदरसा पहले 1938 में गांव के भीतर स्थापित हुआ था। वर्ष 1967 में इसे बांसी-डुमरियागंज मार्ग के किनारे स्थानांतरित किया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। प्रशासन के अनुसार, समय के साथ मदरसा परिसर का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन तक फैल गया। इसी जमीन से कब्जा हटाने को लेकर वर्ष 2022 में पांच ग्रामीणों ने डुमरियागंज तहसीलदार न्यायालय में याचिका दायर की थी।
Siddharthnagar News: 2023 में बेदखली का आदेश, 2026 में डीएम कोर्ट से भी राहत नहीं
मामले की सुनवाई के बाद 2023 में तहसीलदार कोर्ट ने बेदखली का आदेश दिया था। मदरसा के केयरटेकर अब्दुल सलाम ने इस आदेश को डीएम कोर्ट में चुनौती दी। करीब तीन साल चली सुनवाई के बाद 14 अगस्त 2026 को डीएम ने तहसीलदार कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया। निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं हटाए जाने पर मंगलवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
सपा नेताओं और पुलिस में नोकझोंक
कार्रवाई की जानकारी मिलते ही सपा विधायक सैय्यदा खातून, जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
सपा नेताओं का आरोप था कि प्रशासन की कार्रवाई गलत है, जबकि पुलिस अधिकारियों ने इसे न्यायालय और प्रशासनिक आदेश के तहत की जा रही कार्रवाई बताया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को पीछे किया और कार्रवाई पूरी की। एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने कहा कि प्रशासन ने केवल सरकारी जमीन पर बने हिस्से को हटाया है, जबकि निजी भूमि पर बने निर्माण को सुरक्षित रखा गया है।
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