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Vikram-1 की सफल उड़ान के बाद Skyroot का बड़ा ऐलान, अब नियमित कमर्शियल स्पेस लॉन्च की तैयारी

हर महीने एक रॉकेट बनाएगी Skyroot

Skyroot Aerospace: भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 की सफल लॉन्चिंग के बाद Skyroot Aerospace अब अपने अगले बड़े मिशन की तैयारी में जुट गई है। कंपनी ने घोषणा की है कि अब उसका पूरा ध्यान कमर्शियल स्पेस लॉन्च शुरू करने पर रहेगा। Skyroot के CEO पवन कुमार चंदाना ने कहा कि कंपनी नियमित रूप से सैटेलाइट लॉन्च करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही हर महीने एक रॉकेट तैयार करने की क्षमता विकसित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

कमर्शियल लॉन्चिंग होगी शुरू

NDTV Profit से बातचीत में Skyroot के CEO पवन कुमार चंदाना ने बताया कि Vikram-1 की सफलता के बाद कंपनी अब कमर्शियल स्पेस फ्लाइट्स की शुरुआत करेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता Vikram-1 की लॉन्चिंग को नियमित और भरोसेमंद बनाना है। इसके अलावा कंपनी अगली पीढ़ी के Vikram-2 रॉकेट के विकास पर भी तेजी से काम कर रही है।

हर महीने बनेगा एक रॉकेट

करीब आठ साल पहले शुरू हुई Skyroot Aerospace अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का तेजी से विस्तार कर रही है। पवन कुमार चंदाना के मुताबिक, कंपनी की प्रोडक्शन फैसिलिटी को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वह हर महीने एक रॉकेट बना सके। कंपनी का पहला लक्ष्य लगातार सफल लॉन्च करना है, जिसके बाद दुनियाभर में अपनी कमर्शियल लॉन्च सर्विस का विस्तार किया जाएगा।

वैश्विक बाजार पर नजर

Skyroot Aerospace का लक्ष्य दुनिया की प्रमुख सैटेलाइट लॉन्च सर्विस कंपनियों में शामिल होना है। CEO ने बताया कि कंपनी के कई ग्राहक पहले से ही यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कंपनी ग्लोबल स्पेस लॉन्च मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सरकारी सहयोग से मिली रफ्तार

पवन कुमार चंदाना ने कहा कि भारत सरकार की नई स्पेस पॉलिसी और स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों ने निजी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। ISRO और IN-SPACe जैसी संस्थाओं के सहयोग से कंपनी तकनीकी और नियामकीय चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार कर सकी। उन्होंने बताया कि इस मिशन की सफलता में देशभर के 400 से अधिक वेंडर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा और Vikram-1 की उपलब्धि पूरे देश की उपलब्धि है।

Vikram-1 ने बनाया नया इतिहास

शनिवार को भारत ने स्पेस सेक्टर में एक नई उपलब्धि हासिल की, जब Vikram-1 ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सफल उड़ान भरी। यह भारत की किसी निजी कंपनी का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने कई पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित किया।इस मिशन के दौरान Skyroot ने अपने एडवांस्ड कंपोजिट स्ट्रक्चर और 3D-प्रिंटेड इंजन टेक्नोलॉजी का भी सफल प्रदर्शन किया। कंपनी का मानना है कि यही तकनीक भविष्य के कमर्शियल लॉन्च में उसकी सबसे बड़ी ताकत बनेगी।

‘Uber for Space’ बनने का सपना

Vikram-1 की सफलता के बाद CEO पवन कुमार चंदाना का पुराना बयान भी फिर चर्चा में है। NDTV Profit के शो The Disruptors में उन्होंने Skyroot की तुलना SpaceX से करते हुए कहा था कि SpaceX एक बस या ट्रेन की तरह काम करती है, जबकि Skyroot खुद को स्पेस सेक्टर की एक कैब सर्विस के रूप में विकसित करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का सपना “Uber for Space” बनने का है। यानी जिस तरह लोग अपनी जरूरत के अनुसार कैब बुक करते हैं, उसी तरह सैटेलाइट कंपनियां भी अपनी जरूरत के हिसाब से Skyroot का रॉकेट बुक कर सकें और अपने सैटेलाइट को तय कक्षा में आसानी से भेज सकें।

अगला कदम क्या होगा?

Vikram-1 की सफलता के बाद अब Skyroot Aerospace का पूरा फोकस नियमित कमर्शियल लॉन्च शुरू करने, हर महीने एक रॉकेट तैयार करने और Vikram-2 के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने पर है। कंपनी का मानना है कि इन कदमों से वह आने वाले समय में वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में अपनी मजबूत और अलग पहचान बना सकेगी।

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