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अमेरिका–ईरान तनाव का बाजार पर असर: तेल कीमतों में 21% उछाल और 3% लुढ़का बाजार

अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट

Stock Market Crash: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क नजर आए और जोखिम से बचने के लिए बिकवाली बढ़ गई, जिससे बाजार पर दबाव बना।

बाजार खुलते ही निवेशकों को झटका

कारोबार की शुरुआत में ही घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,918.90 अंक के मुकाबले 1,862.15 अंक गिरकर 77,056.75 पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी भी पिछले बंद 24,450.45 अंक से 582.4 अंक फिसलकर 23,868.05 पर खुला।

सुबह करीब 9 बजकर 28 मिनट तक बाजार में गिरावट और बढ़ गई। उस समय सेंसेक्स 2,404.42 अंक यानी 3.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,514.48 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 727.40 अंक यानी 2.97 प्रतिशत गिरकर 23,723.05 पर पहुंच गया।

केवल प्रमुख सूचकांक ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार भी दबाव में दिखा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में लगभग 3.07 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 3.18 प्रतिशत टूट गया।

Stock Market Crash: अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भारी गिरावट

Stock Market Crash: तेल उछाल से बाजार पर दबाव

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में देखी गई, जो बाजार खुलते ही 4 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ गया। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में करीब 3.99 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 3.87 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 3.75 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 2.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहा और निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 1.06 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। इंडिगो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एलएंडटी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद वैश्विक तेल बाजार में तेज हलचल देखने को मिली। एशियाई कारोबार के शुरुआती सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 21 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई और यह करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

ट्रंप बोले, कीमत बढ़ोतरी जरूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने भी उत्पादन घटाने की घोषणा कर दी है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा तथा शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी कीमत है।

चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक पिछले सप्ताह निफ्टी 50 में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और बाजार पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उन्होंने बताया कि साप्ताहिक चार्ट पर कमजोरी का संकेत देने वाली कैंडल बनी है और इंडेक्स 50-सप्ताह के ईएमए के नीचे बंद हुआ है, जो बाजार की कमजोरी को दर्शाता है।

निफ्टी स्तरों पर एक्सपर्ट की चेतावनी

उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल 24,700 से 25,150 के बीच का स्तर निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं 23,850 और 23,600 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि निफ्टी 23,500 के नीचे चला जाता है तो बाजार में गिरावट और बढ़ सकती है।

एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने करीब 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे बाजार पर दबाव बढ़ा। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 6,972 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।

विशेषज्ञों की सलाह: निवेश में बरतें सावधानी

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में वैश्विक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। गिरावट के दौर में केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ही ध्यान देना बेहतर माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी में नई खरीदारी की रणनीति तब अपनानी चाहिए जब इंडेक्स 25,000 के स्तर के ऊपर मजबूती के साथ लगातार ब्रेकआउट दे। ऐसा होने पर बाजार की धारणा सकारात्मक हो सकती है और तेजी का नया दौर शुरू होने की संभावना बनेगी।

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