Student Protest: सरकार ने संसद में होने वाली चर्चा और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं से बातचीत की तैयारी के बीच पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।प्रधानमंत्री ने गुरुवार को घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की जल्दी सुनवाई और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।इसके बाद देर रात वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने बताया कि पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून लाने का प्रस्ताव शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। सरकार की कोशिश रहेगी कि यह विधेयक मानसून सत्र के दौरान ही संसद से पारित हो जाए।
सीजेपी से बातचीत की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे केंद्रीय मंत्रियों और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक होगी। हालांकि, बैठक का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है।प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश आने के कुछ समय बाद ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने 27वें दिन अपना अनशन खत्म किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
पीएम मोदी बोले- पेपर लीक बहुत गंभीर मुद्दा
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पेपर लीक कोई साधारण मामला नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों को भारी मानसिक परेशानी होती है।उन्होंने बताया कि नीट पेपर लीक के बाद पिछले ढाई महीनों में कई अहम कदम उठाए गए हैं। मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों का एक साल खराब न हो, इसलिए सरकार ने कम समय में 22 लाख विद्यार्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। 19 जुलाई को परीक्षा का परिणाम भी घोषित कर दिया गया।उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ परीक्षा कराकर संतुष्ट नहीं है। इसलिए उन्होंने संबंधित विभागों को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए।

कैबिनेट में होगा कानून पर फैसला
प्रधानमंत्री ने बताया कि अधिकारियों ने लगातार काम करके देर रात कानून का मसौदा तैयार कर उन्हें सौंप दिया।शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में इस मसौदे पर चर्चा होगी। मंत्रियों के सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद से पारित कराने का प्रयास करेगी।इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है।उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और जो लोग उनके भविष्य से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों जरूरी?
पेपर लीक मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि दोषियों को सजा मिलने में काफी समय लग जाता है। कई आरोपी कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच भी जाते हैं, जिससे ऐसे अपराधों को बढ़ावा मिलता है।फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से इन मामलों की रोजाना सुनवाई होगी। इससे फैसले जल्दी आएंगे और दोषियों को समय पर सजा मिल सकेगी।हालांकि, इसके साथ जांच एजेंसियों को भी तेजी से काम करना होगा। इसी वजह से प्रधानमंत्री ने जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को तेज करने पर जोर दिया है।
कई हाई कोर्ट के तहत बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
सूत्रों के अनुसार, कलकत्ता, दिल्ली, बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।इस वर्ष हुए नीट पेपर लीक मामले में अब तक 13 लोग हिरासत में हैं और मामले की जांच सीबीआई कर रही है।वहीं, 2024 के नीट पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को और तेज व प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विपक्ष के दबाव के बीच सरकार का कदम
प्रधानमंत्री की यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीजेपी और संसद में विपक्ष चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं।मंगलवार को राजग सांसदों के साथ हुई “मंगल मिलन” बैठक में भी प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक को “महापाप” बताया था।उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और अदालतों में सरकार को वरिष्ठ वकीलों की नियुक्ति करनी चाहिए ताकि मामलों की प्रभावी पैरवी हो सके।
मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर दिया।अब उन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। उन पर यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए लाए गए समता कानून को लेकर भी सवाल उठे थे, जिससे सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए थे सवाल
विनीत जोशी के पास अभी तक उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा और यूजीसी चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार भी था। समता कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाए थे।नीट-यूजी परीक्षा आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आती है।इसी वजह से नीट पेपर लीक मामले में परोक्ष रूप से विनीत जोशी की जवाबदेही भी मानी जा रही थी।
कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले
सरकार ने सचिव स्तर पर कई अन्य अधिकारियों का भी तबादला किया है।पशुपालन मंत्रालय के सचिव नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है।ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव टी.के. अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।वर्तमान पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद विनीत जोशी अपना नया पदभार संभालेंगे।उनके कार्यभार संभालने के बाद नरेश पाल गंगवार उच्च शिक्षा सचिव का पद ग्रहण करेंगे।
पहले निभा चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां
विनीत जोशी पहले एनटीए के महानिदेशक और सीबीएसई के चेयरमैन भी रह चुके हैं।साल 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद बिगड़े हालात के दौरान उन्हें राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया था।इस प्रशासनिक फेरबदल में शहरी विकास मंत्रालय के नए राजधानी विकास विभाग के सचिव पद पर डी. तारा की नियुक्ति भी की गई है। इससे पहले वह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत थीं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी पार्टी
सीजेपी ने प्रधानमंत्री की घोषणा को पर्याप्त नहीं माना। पार्टी ने साफ कहा कि वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम किसी बात पर सहमत नहीं होगी।पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को बातचीत के लिए जंतर-मंतर या किसी अन्य तटस्थ स्थान पर आना चाहिए और सीधे संपर्क करना चाहिए।
देशभर में प्रदर्शन का ऐलान
सीजेपी ने शुक्रवार को देशभर के जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट जारी कर सभी छात्र संगठनों से एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री की पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री के बयान का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह प्रतिक्रिया करीब डेढ़ महीने के आंदोलन के बाद आई है।
सिर्फ सजा से नहीं रुकेगा पेपर लीक
आशुतोष रांका ने कहा कि सिर्फ दोषियों को सजा देने से समस्या खत्म नहीं होगी।उनके अनुसार, सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। जब तक इसके मूल कारणों और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।उन्होंने कहा कि असली जरूरत पेपर लीक होने से पहले उसे रोकने की है, क्योंकि सिस्टम चलाने वाले लोगों की जवाबदेही और क्षमता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब प्रधानमंत्री भी निशाने पर
रांका ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं और सभी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि समय के साथ यह मुद्दा सिर्फ शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व को भी लोग जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
सरकार से सीधे संपर्क की मांग
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि सरकार को बातचीत के लिए सीधे पार्टी से संपर्क करना चाहिए। अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है।उधर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी स्थान पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने सुझाव दिया कि बैठक जंतर-मंतर या कॉन्स्टीट्यूशन क्लब जैसे किसी तटस्थ स्थान पर हो सकती है। हालांकि, उन्होंने भी कहा कि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संदेश नहीं आया है।








