Subsidy Controversy: केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत ₹99.03 लाख की सब्सिडी लेने के आरोपों को लेकर विवादों में हैं। शनिवार को इस मामले पर अपना बचाव करते हुए उन्होंने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत हुई है और वे किसी भी जांच या दस्तावेजों को पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है।
क्या है पूरा विवाद और मंत्री पर आरोप?
रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथ चौधरी को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक योजना के तहत करीब तीन महीने पहले ₹99 लाख से अधिक की सब्सिडी मिली थी। यह सब्सिडी उनके खीरे की खेती (पॉलीहाउस प्रोजेक्ट) के लिए दी गई है। विवाद इसलिए बढ़ गया क्योंकि इस प्रोजेक्ट को ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड’ (NHB) ने मंजूरी दी थी, और चौधरी खुद इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष (Ex-officio Vice President) हैं। उनके विरोधी इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बता रहे हैं।
Subsidy Controversy: चौधरी का पक्ष: किसानों को प्रेरित करने के लिए उठाया कदम
आरोपों पर सफाई देते हुए चौधरी ने कहा, “मैं एक किसान हूं और खेती मेरा पेशा है। मैंने नियमों के मुताबिक बैंक से लोन लेकर करीब 16,592 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस और दो करोड़ लीटर क्षमता के चार फार्म पॉन्ड बनाए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने साइट पर एक बड़ा बोर्ड भी लगाया है जिसमें लोन और सब्सिडी की पूरी जानकारी है। उनके मुताबिक, इस आधुनिक प्रोजेक्ट का मकसद दूसरे किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
क्या कहती है मंत्रालय की गाइडलाइंस?
यह सब्सिडी ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर’ (MIDH) के तहत मिली है, जिसे साल 2014-15 में शुरू किया गया था। इस योजना का संचालन NHB करता है। नियमों के अनुसार:
– शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और चुनिंदा फूलों की कमर्शियल फार्मिंग के लिए प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 50% सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
– इसकी ऊपरी सीमा प्रति परिवार ₹1 करोड़ तय की गई है।
– वर्ष 2025 में मंजूर किए गए 467 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में से ही एक मंत्री भागीरथ चौधरी का भी है।
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