Sukhbir Badal: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात सुखबीर बादल की पहल पर हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था। मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर बादल ने प्रधानमंत्री के सामने पंजाब की कानून व्यवस्था और राज्य में सक्रिय गैंग को लेकर चिंता जाहिर की। साथ ही अकाली दल ने भाजपा के साथ पुराने गठबंधन को दोबारा बहाल करने की इच्छा जताई है।
Sukhbir Badal: पंजाब में 550 से ज्यादा गैंग का मुद्दा उठा-
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान सुखबीर बादल ने पंजाब में 550 से ज्यादा गैंग की मौजूदगी का मुद्दा उठाया। उनका कहना बताया जा रहा है कि ये गैंग केवल स्थानीय कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं हैं, बल्कि नशे के कारोबार और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से भी जुड़े हुए हैं।सूत्रों के अनुसार, कुछ गैंग सदस्यों के सीमा पार आतंकी संगठनों से संपर्क होने की आशंका भी जताई गई। बैठक में पंजाब की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने की बात सामने आई है।
Sukhbir Badal: भाजपा-अकाली दल के फिर साथ आने की अटकलें तेज-
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल चाहता है कि दोनों दल पुरानी परंपरा के अनुसार एक बार फिर मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ें।हालांकि गठबंधन को लेकर अभी दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच सहमति बनना अहम होगा।
37 या 23 सीटों पर अटक सकता है पेंच-
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने मजबूत प्रदर्शन वाले 37 सीटों पर दावा कर सकती है। ऐसे में बाकी 80 सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार उतारे जाने की संभावना बताई जा रही है।वहीं, अकाली दल के सूत्रों का कहना है कि अगर पुरानी परंपरा के आधार पर गठबंधन होता है तो भाजपा को 23 सीटें दी जा सकती हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था और उस समय भाजपा ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
2020 में कृषि कानूनों के बाद अलग हुई थी राह-
भाजपा और अकाली दल का गठबंधन लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में अहम रहा है। दोनों दलों ने आखिरी बार 2017 का विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था।हालांकि 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने भाजपा से दूरी बना ली थी। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दोनों दलों की राहें अलग हो गईं।
2024 लोकसभा चुनाव भी अलग-अलग लड़ा-
2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा और अकाली दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। अब पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच दोबारा नजदीकी बढ़ने की अटकलों ने राज्य की सियासत को गर्म कर दिया है।भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की शुरुआत 1997 में अटल बिहारी वाजपेयी और प्रकाश सिंह बादल के दौर में हुई थी। अब अगर दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो पंजाब की चुनावी राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
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