Surat Demolition Case: गुजरात के सूरत में मई के आखिर में 100 से अधिक कच्चे मकानों को तोड़ दिया गया था। मामले के बाद गुजरात हाई कोर्ट में इसकी कानूनी लड़ाई शुरू हुई। 2 जुलाई को हाई कोर्ट ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि “ग़ैरक़ानूनी तरीके से मकान तोड़े जाने के कारण बेघर हुए परिवारों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ज़िम्मेदारी है।”
हाई कोर्ट के स्टेटमेंट के बाद लोगों में जगी उम्मीद
हाई कोर्ट के इस स्टेटमेंट के बाद नासिरनगर के इस क्षेत्र में लोगों को दोबारा घर मिलने की उम्मीद जगी है। हाल कुछ ऐसा है कि सूरत में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश के कारण लोगों को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।अधिकतर परिवारों ने अलग-अलग जगह किराए के मकान ले लिए हैं, वहीं कुछ लोगों ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले रैन बसेरों में शरण ले ली है।
Surat Demolition Case: 45 वर्षों से रह रहे थे नासिरनगर में
नासिरनगर के निवासी मोहम्मद इरफ़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “मैं पिछले 45 वर्षों से नासिरनगर में रह रहा हूं। ग़ैरक़ानूनी तरीके से घर तोड़े जाने के बाद हम बेघर हो गए। कभी हमें खाना मिल जाता है और कभी नहीं मिलता। हमारे बच्चों की पढ़ाई भी रुक गई है। मेरी दुकान भी चली गई और मैं बेरोजगार हो गया हूं।”उन्होंने कहा, “अब कोर्ट का यह निर्देश आया है, जिससे हमें कुछ राहत मिली है। लेकिन अभी स्थायी समाधान नहीं मिला है। हमारी उम्मीद है कि जहां हमारा घर था, उसी जगह हमें फिर से घर मिले।”
टोरेंट पावर ने भी पेश किया हलफ़नामा
इसके अलावा, टोरेंट पावर के एक अधिकारी की ओर से भी एक हलफ़नामा पेश किया गया। यह गुजरात में स्थित भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक है।कथित रूप से सूरत नगर आयुक्त की जानकारी के बिना ही इन मकानों को तोड़ दिया गया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसके विरोध में प्रभावित निवासी तोड़फोड़ वाली जगह पर धरने पर भी बैठे। बहरहाल, कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 जुलाई तय की है। हाई कोर्ट ने गुजरात सरकार से भी अपील की है और अपनी बात स्पष्ट करने को कहा है।
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