Swatantra Bhardwaj: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।भारद्वाज की गिरफ्तारी उस समय हुई, जब उसके एक पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। वीडियो में वह कथित तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की एक दलित कार्यकर्ता के पिता के साथ हुई मारपीट का जिक्र करता नजर आया। आरोप है कि उसने उनके सिर पर हमला किया था। वीडियो सामने आने के बाद CJP और विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और भारद्वाज की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।
घर पर हुई कोर्ट की कार्यवाही पर उठे सवाल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्र भारद्वाज को 5 सितंबर को करीब दोपहर 2 बजे पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर के आवास पर पेश किया गया।पीड़ित की बेटी की तरफ से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता ऋषव रंजन ने आरोपी को अदालत के सामने पेश किए जाने के तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “अजीब” बताया।
वकील ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भारद्वाज को करीब 1:45 बजे जज के आवास पर पेश किया गया था और उसके लिए विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई थी। उनके अनुसार, उस समय न्यायाधीश नियमित अदालत में नहीं बैठे थे।ऋषव रंजन ने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई थी कि आरोपी के खिलाफ कौन-सी नई धाराएं लगाई गई हैं और पुलिस ने कितने दिनों की रिमांड की मांग की है। उन्होंने सिर्फ एक दिन की पुलिस रिमांड दिए जाने पर भी सवाल उठाया।
Swatantra Bhardwaj: आरोपी के वकील ने दी अलग जानकारी
वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता उमेश शर्मा ने समाचार एजेंसी PTI को इस मामले की अलग जानकारी दी।उन्होंने बताया कि मामले की नियमित सुनवाई करने वाले क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट छुट्टी पर थे। इसी वजह से शुरुआत में वकीलों को बताया गया था कि भारद्वाज को लिंक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।हालांकि, बाद में FIR में SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। इसके बाद जांच अधिकारी ने आरोपी को दूसरे न्यायाधीश के सामने पेश किया। उमेश शर्मा के अनुसार, यह कार्यवाही वर्चुअल या किसी दूसरे माध्यम से हुई।उन्होंने बताया कि अदालत की ओर से उन्हें जानकारी दी गई कि स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

हिंदू संगठनों ने भारद्वाज के समर्थन में किया प्रदर्शन
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में भी प्रदर्शन शुरू हो गए। 5 सितंबर को हिंदू रक्षा दल समेत कुछ हिंदू संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने भारद्वाज के खिलाफ दर्ज FIR से POCSO एक्ट, SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराएं हटाने की मांग की। उनका आरोप था कि भारद्वाज के साथ अन्याय किया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी गलत तरीके से हुई है।पांच सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल संसद मार्ग थाने के अंदर भी गया और पुलिस को अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा।
Swatantra Bhardwaj: 23 जून को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
यह पूरा मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर आयोजित किया गया था।प्रदर्शन के दौरान CJP की दलित कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। FIR में दर्ज जानकारी के मुताबिक, लड़की के पिता अपने मोबाइल फोन से CJP के प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने उन्हें रोकने की कोशिश की।बातचीत और बहस बढ़ने के बाद दो-तीन अन्य लोग भी वहां पहुंच गए। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि लड़की के पिता के सिर पर कई बार मुक्के मारे गए और किसी कठोर वस्तु से भी उनके सिर पर हमला किया गया।पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को वहां से पकड़ा गया, जबकि कुछ अन्य लोग मौके से निकल गए।पुलिस के मुताबिक, संजय को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में उनके सिर पर दो कटे-फटे घाव दर्ज किए गए थे।उस समय पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था।
वायरल पॉडकास्ट के बाद फिर चर्चा में आया मामला
घटना के कई सप्ताह बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। इसकी वजह स्वतंत्र भारद्वाज का करीब एक घंटे लंबा इंटरव्यू/पॉडकास्ट था, जिसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।वायरल वीडियो में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते दिखाई दिए कि उन्होंने दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ दिया था। इसी क्लिप में वह कथित तौर पर यह भी कहते नजर आए कि यह हत्या के प्रयास का मामला है, लेकिन उनके बड़े भाई कपिल मिश्रा का हाथ उनके ऊपर है।वीडियो में भारद्वाज ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें गिरफ्तार किए जाने से पहले ही कपिल मिश्रा का फोन आ गया था। कपिल मिश्रा बीजेपी नेता हैं और 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े विवाद में भी उनका नाम सामने आया था।पॉडकास्ट का वीडियो सामने आने के बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी और CJP ने दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब भारद्वाज खुद सार्वजनिक रूप से घटना में अपनी भूमिका की बात कर रहा था, तो पुलिस ने उसे पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया।
Swatantra Bhardwaj: वायरल बयान पर भारद्वाज ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने वायरल बयान को लेकर सफाई दी। उसने दावा किया कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वह हमला नहीं बल्कि “आत्मरक्षा” थी।भारद्वाज के मुताबिक, उसे 10 से 15 लोगों ने घेर लिया था। उसे डर था कि भीड़ उसे पीट सकती है या उसकी हत्या कर सकती है। उसका कहना है कि उसने खुद को बचाने के लिए कार्रवाई की और इसी दौरान संजय कुमार के सिर में चोट लगी।भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि उसके पास घटना से जुड़े वीडियो सबूत मौजूद हैं और वह पुलिस की जांच में सहयोग कर रहा है।उसने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि राजनीतिक प्रभाव के कारण वह अब तक जेल से बाहर था। भारद्वाज ने कहा कि पॉडकास्ट में उसके कुछ बयान व्यंग्य या मजाक के तौर पर दिए गए थे।
गिरफ्तारी से पहले कांग्रेस और CJP का प्रदर्शन
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी से पहले कांग्रेस और CJP के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया था।CJP ने पुलिस को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की थी। प्रदर्शन में CJP नेताओं के साथ आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए थे।CJP नेताओं ने आरोप लगाया था कि वायरल वीडियो सामने आने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई करने में देरी की। संगठन ने भारद्वाज के खिलाफ SC/ST एक्ट, हत्या के प्रयास और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाने की मांग भी की थी।हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मामले में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या अनुचित प्रभाव के आरोपों को खारिज किया है।








