फंगल इंफेक्शन vs एक्जिमा: कैसे पहचानें अंतर? जानें लक्षण, कारण और इलाज

Fungal Infection vs Eczema:

Fungal Infection vs Eczema: मानसून के मौसम में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। वहीं एक्जिमा भी त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और सूजन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। दोनों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखते हैं, इसलिए कई बार लोग एक्जिमा को फंगल इंफेक्शन समझ लेते हैं। ऐसे में दोनों के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।

Fungal Infection vs Eczema: फंगल इंफेक्शन और एक्जिमा में क्या है समानता-

फंगल इंफेक्शन और एक्जिमा दोनों ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं हैं। इनके कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं।

– दोनों में त्वचा पर रेडनेस और सूजन हो सकती है।
– दोनों में खुजली की समस्या हो सकती है।
– त्वचा ड्राई और रूखी हो सकती है।
– शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दोनों समस्याएं हो सकती हैं।

इसी वजह से बिना सही जांच के दोनों को पहचानना कई बार मुश्किल हो जाता है।

Fungal Infection vs Eczema: फंगल इंफेक्शन और एक्जिमा में क्या अंतर है-

फंगल इंफेक्शन आमतौर पर फंगस या यीस्ट की अधिक ग्रोथ के कारण होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, अधिक नमी और पसीने की वजह से फैल सकता है। दूसरी ओर, एक्जिमा संक्रामक नहीं होता और इसमें शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया तथा त्वचा की संवेदनशीलता की भूमिका हो सकती है।

अंतर फंगल इंफेक्शन एक्जिमा
मुख्य लक्षण लाल, खुजलीदार और उभरे हुए पैच लालिमा, सूजन, ड्राईनेस और खुजली
संक्रामकता दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है संक्रामक नहीं होता
मुख्य कारण फंगस या यीस्ट इम्यून प्रतिक्रिया, एलर्जी और त्वचा की संवेदनशीलता
इलाज एंटीफंगल दवाएं कारण के अनुसार क्रीम और अन्य दवाएं
अवधि सही इलाज से जल्दी राहत मिल सकती है लंबे समय तक रह सकता है और दोबारा भी हो सकता है
फंगल इंफेक्शन के लक्षण-

फंगल इंफेक्शन में त्वचा पर कुछ खास तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। खासकर दाद यानी रिंगवर्म में प्रभावित हिस्से के किनारे उभरे हुए नजर आ सकते हैं।

इसके प्रमुख लक्षण हैं:

– लाल और खुजलीदार चकत्ते।
– त्वचा का छिलना।
– प्रभावित हिस्से के किनारों का उभरा हुआ दिखना।
– हल्की सूजन।
– त्वचा में जलन या असहजता।

एक्जिमा के लक्षण

एक्जिमा में त्वचा अक्सर बहुत ड्राई और खुरदुरी हो जाती है। इसमें खुजली भी काफी तेज हो सकती है।

इसके सामान्य लक्षण हैं:

– त्वचा में ज्यादा ड्राईनेस।
– पपड़ीदार या खुरदुरी त्वचा।
– तेज खुजली।
– त्वचा पर रेडनेस।
– सूजन और जलन।

फंगल इंफेक्शन की जांच कैसे होती है-

Dermatologist Dr. Chandni Jain Gupta के अनुसार, फंगल इंफेक्शन आमतौर पर ब्लड में प्रवेश नहीं करता, इसलिए हर मामले में ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं होती। कुछ मामलों में त्वचा से स्क्रैपिंग लेकर जांच की जाती है। कुछ मरीजों में डॉक्टर स्थिति के अनुसार शुगर या थायराइड टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।

एक्जिमा की जांच कैसे होती है-

एक्जिमा के ज्यादातर मामलों में डॉक्टर त्वचा के लक्षणों और मरीज की हिस्ट्री के आधार पर समस्या का पता लगाते हैं। अगर समस्या कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस यानी किसी बाहरी एलर्जेन के संपर्क से जुड़ी हो, तो पैच टेस्ट या स्किन प्रिक टेस्ट किया जा सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर थायराइड टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।

फंगल इंफेक्शन क्यों होता है-

फंगल इंफेक्शन फंगस या यीस्ट की अधिक ग्रोथ के कारण हो सकता है। मानसून के दौरान नमी और पसीने की वजह से इसका खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा:

– संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से।
– संक्रमित पालतू जानवर के संपर्क से।
– गीली या गंदी जगह पर नंगे पैर चलने से।
– शरीर के हिस्सों में लगातार नमी रहने से।

फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

एक्जिमा होने के क्या कारण हैं-

Dr. Chandni Jain Gupta के अनुसार, एक्जिमा में शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया और त्वचा की संवेदनशीलता की भूमिका हो सकती है। कई मामलों में एक्जिमा के सटीक कारण का पता लगाना मुश्किल होता है। कुछ लोगों में किसी प्रोडक्ट, एलर्जेन या अन्य ट्रिगर के संपर्क में आने से त्वचा की प्रतिक्रिया बढ़ सकती है। इलाज के बाद भी कुछ मामलों में एक्जिमा दोबारा हो सकता है।

दोनों के इलाज में क्या अंतर है-

फंगल इंफेक्शन का इलाज-

फंगल इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है, इसलिए समय पर इलाज जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीफंगल दवाओं या क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मामलों में ओरल एंटीफंगल दवाएं भी दी जा सकती हैं। अगर फंगल इंफेक्शन के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन, पस या दर्द जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक भी दे सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना फंगल इंफेक्शन पर स्टेरॉयड क्रीम लगाने से बचना चाहिए। हल्के मामलों में सही इलाज से कुछ दिनों में राहत मिल सकती है।

एक्जिमा का इलाज-

एक्जिमा के इलाज में सबसे पहले इसके संभावित ट्रिगर या कारण को समझना जरूरी होता है। अगर किसी कॉस्मेटिक या दूसरे प्रोडक्ट की वजह से समस्या हुई है, तो डॉक्टर उसे बंद करने की सलाह दे सकते हैं। एटोपिक डर्मेटाइटिस जैसे एक्जिमा में डॉक्टर जरूरत के अनुसार मेडिकेटेड क्रीम और दवाएं दे सकते हैं। हल्के मामलों में खुजली और एलर्जी को नियंत्रित करने के लिए क्रीम या एंटी-एलर्जी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। गंभीर मामलों में डॉक्टर इंजेक्शन या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।

फंगल इंफेक्शन या एक्जिमा? खुद से इलाज करने से बचें-

फंगल इंफेक्शन और एक्जिमा के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं। ऐसे में बिना सही पहचान के खुद से कोई क्रीम या दवा लगाना समस्या को बढ़ा सकता है। खासकर स्टेरॉयड वाली क्रीम का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। अगर त्वचा पर लगातार खुजली, लाल चकत्ते, सूजन, पपड़ी या घाव जैसी समस्या बनी हुई है, तो सही कारण जानने के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ यानी Dermatologist से सलाह लेना बेहतर है

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