TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। विधानसभा और लोकसभा में बगावत का सामना कर रही पार्टी अब अपने दिल्ली स्थित दफ्तर को लेकर भी मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है। बागी नेताओं ने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय पर दावा ठोकते हुए अभिषेक बनर्जी को दफ्तर खाली करने का पत्र भेजा है। इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को और उजागर कर दिया है।
दिल्ली स्थित दफ्तर को लेकर नया विवाद
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद पार्थो भौमिक ने अभिषेक बनर्जी को पत्र लिखकर दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय खाली करने की मांग की है। यह कार्यालय नई दिल्ली के राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित सरकारी आवास में संचालित होता है। पार्थो भौमिक वर्तमान में पार्टी के बागी गुट का हिस्सा माने जा रहे हैं। ऐसे में कार्यालय को लेकर उठा विवाद पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन गया है।

TMC Crisis: नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर अदालत पहुंचा मामला
पार्टी के अंदर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी। पार्टी ने अदालत से इस फैसले की न्यायिक समीक्षा करने और शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
बागी विधायकों के समर्थन से मजबूत हुआ गुट
पिछले सप्ताह तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किए जाने के बावजूद ऋतब्रत ने बहुमत समर्थन के आधार पर नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा पेश कर दिया। वहीं, संदीपन साहा को सहायक नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिल चुकी है।
TMC Crisis:लोकसभा में भी अलग गुट बनाने का दावा
संकट केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने अलग गुट बनाने का दावा किया है। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा, जिसमें कथित तौर पर 20 सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं। पार्टी के कुल 28 सांसदों में से कई प्रमुख नेताओं के इस गुट के साथ होने की चर्चा है। इससे पहले, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इन घटनाओं ने तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक अस्तित्व का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
Written by- Rashmi Sharma
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