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राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ सीनेट में बिल पास नहीं!

Trump News: राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ सीनेट में बिल पास नहीं!
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Trump News: अमेरिकी सीनेट में युद्ध से जुड़ी राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने के लिए बिल पेश किया गया था, पर वह पास नहीं हो सका। इस बिल के समर्थन में 47 सीनेटरों ने वोट डाले, जबकि इसके खिलाफ 53 वोट पड़े। इस बिल ने साफ कर दिया कि युद्ध करने के लिए राष्ट्रपति की शक्तियों को रोका नहीं जा सकता है, यानी राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध में कूदने के लिए कोई नहीं रोक सकता।

इस बिल से जुड़ा कोई भी आदेश देने से पहले ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद की मंजूरी लेनी जरूरी होती, इस मंजूरी से वह स्वतंत्र हो गये हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों , इजराइल और अन्य जगहों पर हमले किये थे। इस संघर्ष के बाद अमेरिकी सीनेट में इस तरह का बिल ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने के लिए लाया गया था। यह पहला विधेयक था, जो निरस्त हो गया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति को अमेरिकी कांग्रेस से पहले इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वह अपने स्वतंत्र निर्णय से युद्ध में कूद सकता है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध का आज छटवां दिन है। ईरान ने खाड़ी के उस पार मौजूद अपने पड़ोसी अरब देशों को, जो अमेरिका के सहयोगी भी हैं, उन पर हमला करने का फैसला लिया है। कारण उन स्थानों पर अमेरिकी ठिकाने हैं। अब यह जंग पूरे क्षेत्र में फैल गई है। ब्रिटेन ने भी अब अपना रुख बदल दिया है और अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों को इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। जंग लगातार भड़कती जा रही है।

भारत से लौट रहे ईरानी वाॅरशिप को अमेरिका ने डुबोया,87 लोगों की मौत!

मध्य पूर्व में छिड़ी जंग के बीच भारत से युद्ध अभ्यास करके जाते हुए ईरानी वाॅरशिप को अमेरिका ने निशाना बनाया, अभी तक 87 लोगों की मौत की खबरें मिली हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह हमला अमेरिका की पनडुब्बी ने किया, ईरानी जहाज उनका टारगेट था। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद में बताया कि इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। यह जहाज श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर था। युद्धाभ्यास 25 फरवरी को समाप्त हो गया था और वाॅरशिप अपने देश ईरान को लौट रहा था। इस युद्धाभ्यास में भारत के निमंत्रण पर 74 देशों के जहाज शामिल थे। अमेरिका को छोड़कर आस्टेªलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित दर्जनों देश शामिल थे। इस युद्धाभ्यास में देशों का शामिल होने का मकसद समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने का पूर्वाभ्यास था। लग रहा है-जैसे तीसरा विश्व युद्ध दरवाजे पर खड़ा है। देशों की जंगी खेमेेबाजी तेजी से आगे बढ़ रही है। विनाशलीला ही सामने दिख रही है। मानवता के लिए परमाणु हथियारों से लैस देश काल के रूप में सामने खड़े हैं। यह काम किसी भस्मासुर से कम नहीं दिख रहा है।

लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल

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