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यूपी को चार साल बाद मिलेगा स्थायी DGP! UPSC आज तय करेगा 3 नामों का पैनल, जानिए कौन रेस में आगे?

IPS पीयूष आनंद, रेणुका मिश्रा और राजीव कृष्ण

UP DGP: उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार साल बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मंगलवार को दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें यूपी सरकार की ओर से मुख्य सचिव एसपी गोयल शामिल होंगे। बैठक में यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद इनमें से एक अधिकारी को उत्तर प्रदेश का स्थायी DGP नियुक्त किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

ये अधिकारी दौड़ में शामिल

1. सबसे वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी

सीनियरिटी के आधार पर सबसे ऊपर मानी जा रही महिला आईपीएस अधिकारी का प्रशासनिक और शैक्षणिक रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। उन्होंने बीकॉम, एमए (इकोनॉमिक्स) और पुलिस प्रशासन में एमए की डिग्री हासिल की है। वह पहले यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। मई 2021 में उन्हें डीजी रैंक पर प्रमोशन मिला था, लेकिन सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले के बाद जुलाई 2024 से उन्हें नियमित तैनाती नहीं मिली।

2. NDRF महानिदेशक

दूसरे दावेदार वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिदेशक हैं। हाल ही में उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और MDI गुरुग्राम से पब्लिक पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। यूपी पुलिस में रहते हुए उन्होंने 11 जिलों में SP और SSP के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा CBI में करीब सात साल तक कार्य किया और CISF में ADG तथा Special DG जैसे अहम पद भी संभाले।

3. राजीव कृष्ण सबसे प्रबल दावेदार

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण इस पद के सबसे मजबूत दावेदार बताए जा रहे हैं। मई 2022 में मणीलाल गोयल के सेवानिवृत्त होने के बाद से यूपी पुलिस स्थायी प्रमुख के बिना चल रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगा सकती है।

UP DGP: क्यों अहम है स्थायी DGP की नियुक्ति?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में स्थायी DGP की नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले चार वर्षों से पुलिस विभाग कार्यवाहक व्यवस्था के तहत चल रहा था। ऐसे में स्थायी प्रमुख मिलने से पुलिस प्रशासन में स्थिरता, बेहतर समन्वय और दीर्घकालिक रणनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। UPSC की ओर से पैनल भेजे जाने के बाद राज्य सरकार अंतिम नाम का चयन करेगी। इसके बाद औपचारिक मंजूरी मिलने पर नए स्थायी DGP को कार्यभार सौंप दिया जाएगा।

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