UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां जैसे–जैसे तेज हो रही हैं, वैसे–वैसे प्रदेश की कुछ चर्चित सीटों पर सियासी समीकरण भी चर्चा में आने लगे हैं। इटावा की जसवंतनगर विधानसभा सीट भी ऐसी ही सीट है, जहां चुनावी मुकाबले से ज्यादा नजर इस बात पर है कि समाजवादी पार्टी किस चेहरे को मैदान में उतारती है और भारतीय जनता पार्टी इस बार किस रणनीति के साथ चुनाव लड़ती है। जसवंतनगर लंबे समय से मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी सीट रही है। 1967 में मुलायम सिंह यादव ने पहली बार इस सीट से विधानसभा चुनाव जीता था। हालांकि 1969 और 1980 में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा। इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने कई चुनावों में फिर जीत दर्ज की और 1996 से शिवपाल सिंह यादव ने जसवंतनगर की कमान संभाली। 2022 में भी शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर बड़ी जीत दर्ज की।
2022 में भी शिवपाल का दबदबा
2022 के विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट पर शिवपाल सिंह यादव को 1,59,718 वोट मिले, जबकि बीजेपी के विवेक शाक्य 68,739 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। दोनों के बीच जीत का अंतर 90,979 वोट रहा। यह आंकड़ा बताता है कि पिछला विधानसभा चुनाव इस सीट पर समाजवादी पार्टी के पक्ष में काफी बड़े अंतर से गया था। लेकिन 2027 में तस्वीर कैसी होगी, इसको लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जसवंतनगर की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या शिवपाल सिंह यादव 2027 में खुद चुनाव लड़ेंगे या परिवार के किसी दूसरे सदस्य को इस सीट से मैदान में उतारा जा सकता है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उनकी पुत्रवधू को चुनावी राजनीति में उतारे जाने की संभावना का भी जिक्र हो रहा है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल अभी चर्चा और संभावनाओं तक ही सीमित है कि क्या शिवपाल यादव अपनी पारंपरिक सीट पर किसी नए चेहरे को मौका देंगे। अगर ऐसा होता है तो जसवंतनगर का चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं रहेगा, बल्कि यह समाजवादी परिवार की अगली पीढ़ी की राजनीतिक एंट्री के तौर पर भी देखा जा सकता है।
UP Election 2027: बीजेपी के सामने जसवंतनगर में चुनौती
दूसरी तरफ बीजेपी के लिए भी जसवंतनगर अहम सीट है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी यहां मुख्य मुकाबले में रही है। 2017 में बीजेपी के मनिश यादव पाटरे दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि 2022 में विवेक शाक्य ने शिवपाल यादव को चुनौती दी। ऐसे में 2027 के चुनाव में बीजेपी किस सामाजिक समीकरण और किस चेहरे के साथ मैदान में उतरती है, यह भी देखने वाली बात होगी। जसवंतनगर में यादव मतदाताओं के साथ–साथ अन्य पिछड़ा वर्ग और दूसरे सामाजिक समूहों की भूमिका भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों और पार्टी की रणनीति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या करहल जैसी रणनीति यहां भी दिखेगी?
2027 के चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी जसवंतनगर में भी ऐसा उम्मीदवार उतारने की कोशिश करेगी, जो सीधे शिवपाल यादव के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती दे सके। पिछले चुनाव में पार्टी ने यहां विवेक शाक्य को मैदान में उतारा था और वह दूसरे स्थान पर रहे। 2027 में पार्टी उसी रणनीति को आगे बढ़ाती है या किसी नए सामाजिक समीकरण के साथ बड़ा चेहरा सामने लाती है, इसका फैसला टिकट घोषित होने के बाद ही साफ होगा। फिलहाल जसवंतनगर में चुनावी चर्चा तीन सवालों के इर्द–गिर्द घूम रही है— क्या शिवपाल यादव खुद मैदान में उतरेंगे? क्या परिवार का कोई नया चेहरा उनकी जगह लेगा? और क्या बीजेपी इस बार कोई बड़ा राजनीतिक दांव चलेगी?
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