Up Mosque Controversy: उत्तर प्रदेश में पश्चिमी यूपी की चार मस्जिदें इन दिनों अलग-अलग वजहों से चर्चा में हैं। सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर प्रशासन ने कार्रवाई की, मुरादाबाद में मुस्तफा मस्जिद से निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगे गए, संभल में बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद की शिकायत पर एएसआई ने जांच शुरू की और मेरठ में शाही जामा मस्जिद के वैज्ञानिक परीक्षण की मांग उठी है। इन सभी मामलों में प्रशासन का जोर संबंधित जमीन, निर्माण की वैधता और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच पर है।
सहारनपुर: सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण का मामला
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण था। मामले में उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया चली। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। इसके बाद स्थानीय अदालत में की गई अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने 6 सितंबर को ढांचे को ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के बाद मौके पर एक पुराने कुएं की मौजूदगी भी सामने आई। इसके बाद उसके पुरातात्विक महत्व की जांच के लिए एएसआई की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। यानी प्रशासन की कार्रवाई का आधार निर्माण और जमीन से जुड़ा कानूनी विवाद रहा, जबकि कुएं की प्रकृति की जांच अलग से की जा रही है।
Up Mosque Controversy: मुरादाबाद: मुस्तफा मस्जिद से मांगे गए निर्माण के दस्तावेज
मुरादाबाद के पाकबड़ा स्थित मुस्तफा मस्जिद को लेकर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब 300 वर्ग मीटर जमीन पर बनी मस्जिद के निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा या जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसी को स्पष्ट करने के लिए प्राधिकरण ने निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं।
वहीं मस्जिद के केयरटेकर का कहना है कि यह निर्माण करीब 35-40 वर्ष पुराना है और उनके पिता ने निजी जमीन पर कराया था। ऐसे में इस मामले में अभी मुख्य सवाल यही है कि निर्माण के लिए जरूरी स्वीकृतियां और दस्तावेज क्या हैं। फिलहाल यहां कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
संभल: शिकायत के बाद ASI की जांच शुरू
संभल के चौधरी सराय इलाके में स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को लेकर भी शिकायत सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मस्जिद का निर्माण ऐसी जमीन पर हुआ है, जो राजस्व रिकॉर्ड में दूसरी मस्जिद के नाम दर्ज है। शिकायत के बाद एएसआई की टीम ने मौके का निरीक्षण किया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एएसआई की जांच के निष्कर्ष और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति तय होगी। यानी इस मामले में भी सरकार की ओर से सीधे कोई अंतिम कार्रवाई नहीं की गई है, बल्कि तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया चल रही है।
Up Mosque Controversy: मेरठ: शाही जामा मस्जिद के ASI सर्वे की मांग
मेरठ की शाही जामा मस्जिद को लेकर एक अधिवक्ता ने प्रशासन को पत्र देकर वैज्ञानिक जांच और एएसआई सर्वे की मांग की है। उनका दावा है कि मस्जिद के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ या अन्य पुरातात्विक संरचनाएं हो सकती हैं। इसके लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों का भी हवाला दिया गया है। हालांकि, यह फिलहाल एक मांग और दावा है। एएसआई की जांच से इसकी पुष्टि होना बाकी है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
चारों मामलों में सरकार का क्या रुख है?
इन चारों मामलों की कानूनी स्थिति अलग है। सहारनपुर में प्रशासन ने अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीन से जुड़े आदेशों के आधार पर कार्रवाई की, जबकि मुरादाबाद में निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं। संभल में शिकायत के आधार पर एएसआई जांच कर रही है और मेरठ में एएसआई सर्वे की मांग सामने आई है।
सरकार और प्रशासन का मूल जोर कानून के मुताबिक कार्रवाई, सरकारी जमीन और निर्माण रिकॉर्ड की जांच तथा शिकायतों के तथ्यों की पुष्टि पर है। इसलिए मुरादाबाद और संभल जैसे मामलों में जांच पूरी होने से पहले किसी अंतिम कार्रवाई का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। वहीं सहारनपुर मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अब न्यायिक चुनौती भी सामने आ चुकी है, जिस पर आगे अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
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