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यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, नहीं ले सकेंगे नीतिगत फैसले

Up News: यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक

Up News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ग्राम पंचायत प्रधानों की तर्ज पर अब जिला पंचायत अध्यक्षों को भी छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 11 जुलाई 2026 को उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद 12 जुलाई से नई जिला पंचायतों के गठन तक वे प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। हालांकि इस दौरान उन्हें केवल नियमित प्रशासनिक कार्य करने की अनुमति होगी और कोई भी नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा।

छह महीने तक प्रशासक की भूमिका निभाएंगे अध्यक्ष

पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सभी मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष नई जिला पंचायतों के गठन तक प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान न आने देना है। इस अवधि में वे केवल दैनिक और नियमित कार्यों का संचालन करेंगे।

Up News: नीतिगत फैसलों पर रहेगा प्रतिबंध

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक बनाए गए जिला पंचायत अध्यक्ष किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। यदि किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा निर्णय आवश्यक होता है, तो उसका प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। शासन की अनुमति मिलने के बाद ही उस पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश

राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे संबंधित जिला पंचायत अध्यक्षों को विधिवत प्रशासक के रूप में नामित करें। पंचायती राज विभाग ने पहले ही इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया था, जिस पर सरकार ने मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह व्यवस्था 12 जुलाई से प्रभावी होगी।

Up News: ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायतों में भी नई व्यवस्था

इससे पहले 26 मई को ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार ने पहली बार उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किया था। इससे पहले यह जिम्मेदारी आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारियों को दी जाती थी। अब उसी व्यवस्था को जिला पंचायत अध्यक्षों पर भी लागू किया गया है। माना जा रहा है कि नई जिला पंचायतों के गठन और आगामी पंचायत चुनावों तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी, जिससे स्थानीय प्रशासनिक कार्य बिना किसी रुकावट के चलते रहें।

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