UP News: उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला है। यह सियासी टकराव उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें सम्राट चौधरी ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए परिवारवाद का मुद्दा उठाया था।
सम्राट चौधरी का बयान बना विवाद की वजह
पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने लालू प्रसाद यादव, राहुल गांधी और अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव की बेटी, राहुल गांधी की बहन और अखिलेश यादव की पत्नी ही सदन क्यों जाएं? उनके इस बयान को विपक्ष ने महिलाओं और परिवार को लेकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
UP News: अखिलेश ने किया पलटवार
वहीं सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना नाम लिए सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि जघन्य अपराध करने वाले, अपराध से बचने के लिए उम्र बदलने वाले, विचारहीन और सिद्धांतहीन होकर बार-बार दल बदलने वाले, छल से सत्ता हासिल करने वाले और भ्रष्टाचार के शिरोमणि कहलाने वाले व्यक्ति बिहार के मुख्यमंत्री क्यों बनें? अखिलेश यादव का यह बयान राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और इसे सीधा-सीधा सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत हमला माना जा रहा है। हालांकि, अखिलेश यादव के इस तीखे बयान के बाद भी सम्राट चौधरी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर आगे और सियासी बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।
जघन्य अपराध करनेवाले, अपराध से बचने के लिए उम्र बदलनेवाले, विचारहीन-सिद्धांतहीन होकर दल पर दल बदलनेवाले, किसीको छल से हटानेवाले, भ्रष्टाचार के शिरोमणि कहलानेवाले बिहार के मुख्यमंत्री क्यों बनें? pic.twitter.com/f9wQPXyB0L
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 20, 2026
बता दें कि सम्राट चौधरी हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं और उन्होंने नीतीश कुमार की जगह पद संभाला है। इससे पहले वे राज्य के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और गृह मंत्रालय जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। राजनीतिक सफर की बात करें तो सम्राट चौधरी पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद कम समय में ही वे राज्य की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे।








