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SIR पर राहुल गांधी को झटका, अपने ही मंत्री ने उठाए सवाल

UP News : कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा सवाल उठ खड़ा हुआ है, जिसका जवाब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को देना पड़ सकता है। चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं, लेकिन कर्नाटक में उनकी ही पार्टी के मंत्री सतीश जारकीहोली ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अभियान और राज्य के अनुभव के बीच अंतर साफ कर दिया है।
जारकीहोली का कहना है कि कर्नाटक में SIR की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि हटाए गए नामों में मृत मतदाता, दूसरे स्थानों पर जा चुके लोग और मतदाता सूची में दर्ज डुप्लीकेट नाम शामिल थे।
अब सवाल यह है कि जब कांग्रेस की सरकार में बैठा एक मंत्री कर्नाटक की प्रक्रिया को सही बता रहा है, तो दूसरे राज्यों में इसी प्रक्रिया पर पार्टी की आपत्तियों का आधार क्या है?
राहुल गांधी के अभियान के बीच अपने ही मंत्री का बयान
राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप रहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
लेकिन जारकीहोली ने कहा कि कर्नाटक में प्रक्रिया सही रही और पार्टी की आपत्तियां बिहार, पश्चिम बंगाल तथा महाराष्ट्र में इसे लागू करने के तरीके को लेकर थीं।
यानी बहस अब केवल SIR के पक्ष या विपक्ष की नहीं रह गई है। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में प्रक्रिया के क्रियान्वयन को अलग-अलग आधार पर परख रही है, या उसके नेताओं के बीच इस मुद्दे पर स्पष्ट सहमति का अभाव है?
राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए आरोपों को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर भी तथ्यों और दलीलों में स्पष्टता जरूरी है।
UP News : करीब एक करोड़ नाम हटे, आंकड़ों ने बढ़ाई बहस
कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची में 4,55,00,011 मतदाता दर्ज थे, जबकि पुनरीक्षण से पहले यह संख्या 5,54,32,314 थी। यानी कुल 99,32,303 नामों की कमी दर्ज हुई।
जारकीहोली ने इस कमी को मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने से जोड़ा। उनके मुताबिक, दूसरे राज्यों में भी पुनरीक्षण का काम इसी तरह सही ढंग से किया जाना चाहिए था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: मतदाता सूची से नाम हटने की कुल संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि हर हटाया गया नाम गलत था, और न ही यह साबित करती है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया गया। इसके लिए श्रेणीवार आंकड़ों, सत्यापन और शिकायतों के निपटारे की जानकारी जरूरी है।
कांग्रेस के भीतर भी उठे सवाल
जारकीहोली के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी नेता बी.के. हरिप्रसाद ने अनुपस्थित चिह्नित मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने मृत और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की जरूरत स्वीकार करते हुए पूछा कि अनुपस्थित बताए गए मतदाता आखिर कहां गए।
यह सवाल सीधे मतदाता अधिकारों से जुड़ा है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या उसका नाम गलती से कई जगह दर्ज है, तो सूची में सुधार जरूरी है। लेकिन यदि कोई पात्र नागरिक केवल अनुपस्थित होने के कारण सूची से बाहर हो गया है, तो उसके पास नाम वापस जुड़वाने का प्रभावी रास्ता होना चाहिए।
इसलिए न तो हर हटाए गए नाम को गड़बड़ी मानना उचित है, न ही बिना श्रेणीवार सत्यापन के हर हटाए गए नाम को सही ठहराना।
UP News : राहुल गांधी के सामने अब जवाबदेही की चुनौती
सतीश जारकीहोली के बयान ने कांग्रेस के सामने एक राजनीतिक और संगठनात्मक सवाल जरूर खड़ा किया है। यदि कर्नाटक में पार्टी की भागीदारी, विरोध और कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के कारण प्रक्रिया बेहतर रही, जैसा कि मंत्री का दावा है, तो दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के सुरक्षा उपायों की मांग करना कांग्रेस की दलील का हिस्सा हो सकता है।
लेकिन यदि पार्टी का आरोप यह है कि SIR के कारण पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं, तो उसे ठोस उदाहरण, आधिकारिक आंकड़े और शिकायतों के नतीजे भी सामने रखने होंगे।
राहुल गांधी को इस बहस में केवल राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी आपत्ति पूरी प्रक्रिया से है या उन मामलों से, जहां सत्यापन और क्रियान्वयन में कथित खामियां हैं। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी भी है कि वह हटाए गए नामों का स्पष्ट विवरण और प्रभावित नागरिकों के लिए शिकायत निवारण की जानकारी उपलब्ध कराए।
निष्कर्ष: बहस नारों से नहीं, आंकड़ों से तय होगी
कर्नाटक में SIR को लेकर सतीश जारकीहोली का बयान कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान के लिए असहज जरूर है
करीब एक करोड़ नाम किन श्रेणियों में हटाए गए, कितने पात्र मतदाताओं ने आपत्ति दर्ज कराई और कितने मामलों में नाम बहाल किए गए?
राहुल गांधी हों, सतीश जारकीहोली हों या चुनाव आयोग—किसी का भी दावा इन सवालों का विकल्प नहीं हो सकता। मतदाता सूची की शुद्धता और हर पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार, दोनों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
क्योंकि लोकतंत्र में राजनीतिक बयानबाजी से सुर्खियां बन सकती हैं, लेकिन मतदाता के अधिकारों का फैसला रिकॉर्ड, सत्यापन और पारदर्शिता से ही होना चाहिए।

 

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