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खामेनेई की मौत पर क्यों ‘विधवा-विलाप’ करने लगीं मुस्लिम महिलाएं?

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Up News: अमेरिका-इजराइल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के दावे के बाद भारत, खासकर लखनऊ में शिया समुदाय के बीच जबरदस्त भावनात्मक उबाल देखने को मिला। सड़कों पर उतरी शिया महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं। काले कपड़े, काले झंडे और “खामेनेई जिंदाबाद” के नारे इस शोक को सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे थे। इसी दृश्य को देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठा कि किसी विदेशी नेता की मौत पर ऐसा गहरा विलाप क्यों?

धार्मिक मार्गदर्शक के रूप में खामेनेई

शिया समुदाय के लिए खामेनेई केवल ईरान के राजनीतिक प्रमुख नहीं थे। उन्हें एक धार्मिक, वैचारिक और नैतिक मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता था। शिया इस्लाम में मरज-ए-तक़लीद की परंपरा है, जिसमें किसी वरिष्ठ धर्मगुरु को जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन देने वाला माना जाता है। इसी कारण उनकी मौत को समुदाय ने किसी राष्ट्राध्यक्ष की नहीं, बल्कि अपने आध्यात्मिक संरक्षक के खोने की तरह महसूस किया।

Up News: शोक की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा

शिया इतिहास में शोक और बलिदान का विशेष स्थान है। कर्बला की घटना, इमाम हुसैन की शहादत और मुहर्रम के मातमी जुलूस—ये सभी शिया धार्मिक चेतना के केंद्र में हैं। ऐसे में किसी बड़े शिया नेता की मृत्यु पर सार्वजनिक शोक मनाना स्वाभाविक माना जाता है। महिलाओं का रोना, सीना पीटना और विलाप करना इसी परंपरा का हिस्सा है, जिसे बाहर से देखने पर ‘विधवा-विलाप’ कहा जा रहा है।

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नारों में दिखा दुख के साथ प्रतिरोध

प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं ने खामेनेई को “शेर” और “शहीद” बताया। “एक खामेनेई मरेगा, हजार पैदा होंगे” जैसे नारों में सिर्फ दुख नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ गुस्सा और प्रतिरोध की भावना भी साफ झलकती है। यह शोक भावनात्मक होने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी दे रहा था।

Up News: तीन दिन का शोक और मजलिस का ऐलान

इस बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन दिन के शोक की घोषणा की। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि लोग अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे और रोजाना मजलिस (शोकसभा) का आयोजन करेंगे।

सामूहिक भावनात्मक विस्फोट

कुल मिलाकर, यह शोक किसी एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है। यह शिया धार्मिक पहचान, नेतृत्व और ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा एक सामूहिक भावनात्मक विस्फोट है, जिसे केवल राजनीतिक नजरिये से देखने पर इसकी गहराई समझना मुश्किल हो जाता है।

Up News:  खाड़ी रूट ठप: यूपी से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द

तनाव के असर से हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ। लखनऊ से सऊदी अरब जाने वाली सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। दुबई और रियाद की दो-दो फ्लाइट, जबकि मस्कट, अबू धाबी, दम्माम और शारजाह की एक-एक फ्लाइट कैंसिल हुई। वहीं वाराणसी एयरपोर्ट से दुबई की दो उड़ानें 4 मार्च तक रद्द कर दी गई हैं।

शहर में सतर्कता, माहौल गर्म

प्रशासन ने एहतियातन निगरानी बढ़ा दी है। लखनऊ के कई इलाकों में सुरक्षा तैनात रही। शोक और आक्रोश के इस संगम ने साफ कर दिया है कि खामेनेई की मौत का दावा भारत के शिया समुदाय में गहरे भावनात्मक और राजनीतिक असर के साथ सामने आया है।

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