UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में अपनी पहली बड़ी रैली के जरिए राजनीतिक वापसी का संदेश दिया। 30 वर्षीय आकाश ने इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया।
‘अखिलेश भैया नहीं, अखिलेश अंकल हैं’
रैली के दौरान भीड़ से जब अखिलेश यादव को ‘भैया’ कहने की बात कही गई तो आकाश आनंद ने जवाब दिया, “वे अखिलेश अंकल हैं, अखिलेश भैया नहीं। मेरी उम्र 30 साल है और वे 50 के पार हैं।” आकाश का यह बयान महज व्यक्तिगत टिप्पणी के बजाय युवा बनाम पुराने नेतृत्व की राजनीतिक छवि बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। BSP अब खुद को उत्तर प्रदेश की युवा पीढ़ी के सामने एक नए विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
UP Politics: BSP की नजर युवा और पहली बार वोट देने वालों पर
BSP का पारंपरिक आधार दलित मतदाता रहा है, लेकिन पार्टी अब इस दायरे को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसके केंद्र में युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता हैं।आकाश आनंद को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में दौरे और कार्यकर्ता सम्मेलनों की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी संगठन को बूथ स्तर पर युवाओं से जोड़ने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
NEET और छात्र आंदोलनों का भी जिक्र
आकाश आनंद ने युवाओं के बीच अपनी अपील मजबूत करने के लिए परीक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दों को भी उठाया है। उन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वह उसी पीढ़ी से आते हैं जिसने सड़कों पर उतरकर सरकारों से सवाल किए हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि केवल भाषण देने या सड़क पर प्रदर्शन करने से व्यवस्था नहीं बदलती। बदलाव के लिए सही नेता और पार्टी का चुनाव कर मतदान करना जरूरी है।
UP Politics: डिजिटल कैंपेन और बूथ पर युवाओं की रणनीति
BSP की नई रणनीति में सोशल मीडिया को भी अहम भूमिका दी जा रही है। पार्टी युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए डिजिटल प्रचार, रील्स और स्थानीय भाषाओं में कंटेंट पर जोर दे रही है। पार्टी की ओर से बूथ स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। बताया जा रहा है कि करीब 10 युवा प्रति बूथ जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चुनाव से पहले एक बड़ा युवा संगठनात्मक नेटवर्क तैयार करना है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं Gen Z वोटर?
उत्तर प्रदेश में करीब 13 करोड़ मतदाता हैं और 18 से 27 वर्ष की उम्र के युवाओं की संख्या करीब 2 करोड़ से अधिक बताई जाती है। ऐसे में पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाता चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था। ऐसे में युवा मतदाताओं के एक हिस्से का रुख बदलना कई सीटों के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि युवा मतदाताओं को किसी एक दल का स्थायी वोटबैंक मानना आसान नहीं है। रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, महंगाई और सोशल मीडिया पर राजनीतिक विमर्श जैसे मुद्दे उनके मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
UP Politics: आकाश आनंद का राजनीतिक सफर रहा उतार-चढ़ाव भरा
आकाश आनंद की मौजूदा सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब पिछले कुछ वर्षों में उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर घोषित किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके एक भाषण को लेकर विवाद और FIR के बाद मायावती ने उन्हें पदों से हटा दिया था। इसके बाद 2025 में संगठन और पारिवारिक स्तर पर विवादों के बीच उन्हें पार्टी से अलग किया गया, लेकिन बाद में उनकी वापसी हुई। अब एक बार फिर आकाश आनंद को BSP की युवा रणनीति के केंद्र में रखा गया है।
क्या 2027 में बदल पाएगा BSP का समीकरण?
आकाश आनंद के सामने सबसे बड़ी चुनौती BSP के पारंपरिक दलित आधार को बनाए रखते हुए युवाओं और अन्य सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की है। ‘अखिलेश भैया नहीं, अंकल’ जैसे बयान इसी व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा दिखाई देते हैं। BSP की रणनीति सफल होती है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आकाश आनंद युवाओं के बीच सिर्फ सोशल मीडिया और रैलियों के जरिए चर्चा पैदा करते हैं या उसे बूथ स्तर के वास्तविक वोट में बदलने में भी कामयाब होते हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव इस प्रयोग की सबसे बड़ी परीक्षा होगा।
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