Up Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित और बहुजन राजनीति को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। लखनऊ में नवंबर और दिसंबर के दौरान दो बड़े राजनीतिक आयोजन होने जा रहे हैं। पहले 26 नवंबर को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद संविधान दिवस पर महारैली करेंगे। इसके ठीक 10 दिन बाद यानी 6 दिसंबर को बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेंगी। दोनों आयोजन एक ही क्षेत्र में होने के कारण इन्हें यूपी की दलित राजनीति में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
26 नवंबर को चंद्रशेखर आजाद की महारैली
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर ‘बहुजन स्वराज संकल्प महारैली’ आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रदेशभर से समर्थकों और कार्यकर्ताओं को जुटाने के लिए संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए जिला, मंडल और विधानसभा स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
Up Politics: प्रदेशभर से लोगों को जुटाने की तैयारी
महारैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश स्तरीय बैठक भी की गई है। इसमें अलग-अलग जिलों के पदाधिकारियों और संगठन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पार्टी की ओर से वॉलिंटियर टीमों का गठन किया जा रहा है। इनकी जिम्मेदारी दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को रास्ते की जानकारी देने, कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने और आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करने की होगी।
6 दिसंबर को मायावती का शक्ति प्रदर्शन
चंद्रशेखर आजाद की महारैली के 10 दिन बाद 6 दिसंबर को मायावती भी लखनऊ में बड़ा आयोजन करेंगी। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित होगा। इसके लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल को चुना गया है। मायावती स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। पार्टी की ओर से इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
Up Politics: 75 जिलों के पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
मायावती ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें आगामी कार्यक्रम के साथ 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की भी समीक्षा हुई। पार्टी पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और दलित, पिछड़े तथा अन्य कमजोर वर्गों को पार्टी से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
2010 के बाद रमाबाई स्थल पर बड़ी रैली की तैयारी
रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल लंबे समय से बसपा की राजनीतिक ताकत का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां वर्ष 2010 में बसपा की बड़ी रैली आयोजित हुई थी, जिसमें पांच लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया गया था। इसके बाद पार्टी की ओर से इस स्थल पर वैसी बड़ी रैली आयोजित नहीं की गई। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा यहां बड़े स्तर पर आयोजन की तैयारी कर रही है।
Up Politics: दलित वोट बैंक पर किसकी कितनी पकड़?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बसपा का लंबे समय से इस वर्ग में मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। वहीं, चंद्रशेखर आजाद भी आजाद समाज पार्टी के जरिए दलित और युवा मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने में जुटे हैं। ऐसे में 26 नवंबर और 6 दिसंबर के दोनों आयोजन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन राजनीति में दोनों नेताओं के संगठनात्मक प्रभाव और जनसमर्थन को परखने का अवसर होंगे।
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