UP Politics: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अपने फैसलों पर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, SIR समेत सभी महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी शामिल रही है।
आयोग का यह पक्ष रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।

आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आयोग के भीतर मतभेद के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सभी फैसले तीनों सदस्यों की मंजूरी और सहमति से लिए गए। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले किसी एक सदस्य के स्तर पर नहीं लिए गए। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में संधू और जोशी की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे और कुछ मामलों में संबंधित कार्रवाई को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ तक बताया था।
UP Politics: SIR में किन मुद्दों पर उठे सवाल?
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां कई अहम मुद्दों से जुड़ी थीं। इनमें नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया तथा कुछ मामलों में अपील दाखिल करने के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता सूची के डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई थी।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी इस मुद्दे पर मीडिया के सामने विस्तार से अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी गई और उनसे सलाह नहीं ली गई। पार्टी ने SIR, फॉर्म-6 में बदलाव, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों का जिक्र किया। ये कांग्रेस के आरोप हैं।
UP Politics: सुप्रिया सुले ने भी जताई चिंता
NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए सवाल चिंताजनक हैं। उन्होंने हर नागरिक के वोट के समान महत्व का जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया में भरोसे को जरूरी बताया।
SIR को लेकर पहले से जारी है बहस
SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस पहले से चल रही है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर अपील की प्रक्रिया भी चर्चा में है। वहीं, दिल्ली में SIR के दौरान भेजे गए ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
UP Politics: SIR से आगे बढ़ा विवाद, अब आयोग की प्रक्रिया पर नजर
SIR को लेकर सामने आए दो अलग-अलग पक्षों ने चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को भी चर्चा में ला दिया है। एक तरफ आयोग से जुड़े सूत्र सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज लिखित आपत्तियों का हवाला दिया गया है। ऐसे में बहस अब केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग के भीतर फैसले कैसे लिए गए, आपत्तियों पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता कितनी रही-ये सवाल भी चर्चा के केंद्र में हैं।
ये भी पढ़े… ‘योगी जी फिर आएं’, यूपी की जनता ने गिनाए सरकार के काम, अखिलेश यादव के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया









