US–Iran tension: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के विमानन क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ती अनिश्चितता ने भारतीय एयरलाइंस की आर्थिक स्थिति को हिला दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि Air India, IndiGo और SpiceJet जैसी कंपनियों ने केंद्र सरकार से तुरंत राहत देने की अपील की है।
ईंधन की कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से एयरलाइंस पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
एयरलाइन इंडस्ट्री में ईंधन का खर्च कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत होता है, ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर कंपनियों के बजट पर पड़ता है।
US–Iran tension: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ज्यादा दबाव
एयरलाइंस का कहना है कि घरेलू उड़ानों के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर ईंधन की कीमतों में कहीं ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा रुपये की गिरती कीमत और 11 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
US–Iran tension: होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा संकट
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और रुकावटों के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
यात्रियों पर असर तय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करनी पड़ सकती है। इसका असर सीधे यात्रियों पर पड़ेगा टिकट महंगे होंगे और उड़ानों की उपलब्धता कम हो सकती है।
सरकार से राहत की मांग
एयरलाइंस ने सरकार से मांग की है कि इस मुश्किल समय में उन्हें वित्तीय सहायता दी जाए। साथ ही, ATF पर टैक्स में राहत और कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं, ताकि विमानन क्षेत्र को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
यह भी पढे़ : धर्म पूछा, कलमा पढ़ने को कहा; ATS को ISIS से जुड़े दस्तावेज मिले कब तक सहेगा हिंदुस्तान ?








