US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बार-बार युद्ध विराम टूट रहा है। दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। दोनों में से कोई भी हार मानने को तैयार नहीं है।यही वजह है कि मिडिल-ईस्ट एक बार फिर से अशांत है। पूरी दुनिया चिंतित है कि उसे जंग के दुष्परिणाम झेलने को विवश होना पड़ेगा। युद्ध विराम टूटने के बाद दोनों ओर से वार-पलटवार का सिलसिला तेज हो चुका है। धमाकों की गूंज लोगों के कलेजों को दहला रही है।
टकराव के कारण
दोनों देशों के अपने-अपने अहं टकरा रहे हैं। अमेरिका की कोशिश रही है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान इस दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इसी तरह दुनिया के सबसे प्रमुख तेल व्यापार मार्ग होर्मुज को लेकर अमेरिका का स्टैंड है कि इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्वतंत्र रखा जाना चाहिए, जबकि ईरान इस पर अपना संप्रभु अधिकार जता रहा है। इसके अलावा ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाए और जो युद्ध उस पर थोपा गया है उसकी क्षतिपूर्ति की जाए।
US-Iran War: खतरे की आशंका क्यों?
युद्ध विराम टूटने के बाद अमेरिका ने ईरान पर भयंकर हमले शुरू कर दिये हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जो उग्र तेवर दिखा रहे हैं, उन्हें देखते हुए दुनिया के लोग चिंतित हैं कि क्या अमेरिका अतीत की भयंकर गलती तो नहीं दोहरायेगा। अमेरिका की तरफ से इसलिए भी खतरे की आशंका है कि वह द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराकर भीषण नरसंहार कर चुका है। उसके पास पास ईरान पर परमाणु बम गिराने की पूरी क्षमता है।
US-Iran War: क्या होगी अमेरिका की रणनीति?
हालांकि अमेरिका अतीत में परमाणु बम का इस्तेमाल अवश्य कर चुका है, लेकिन आज के हालात में वह शायद ही ऐसा करे। शायद उसे लगता है कि ईरान भी परमाणु ताकत हासिल कर चुका है। इसके अलावा उसे परमाणु बम का इस्तेमाल करने से पहले यह बात भी अवश्य सोचनी पड़ेगी कि दुनिया भर में उसका भारी विरोध होगा। परमाणु हथियारों का इस्तेमाल विश्व युद्ध का कारण बन सकता है।जन-धन के साथ ही विश्व के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा।लिहाजा अमेरिका की कोशिश होगी कि वह कूटनीतिक और रणनीतिक तरीके से ही ईरान को झुकने के लिए विवश करे।परमाणु हमला करने के बजाए अमेरिका ईरान के भूमिगत परमाणु स्थलों पर हमले को प्राथमिकता देगा।पहले भी उसकी सेना इसी कोशिश में रही है।








