US Visa News: अमेरिका ने बिजनेस (बी-1) और टूरिस्ट (बी-2) वीजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 50 देशों के नागरिकों के लिए 20,000 डॉलर (करीब 16.8 लाख रुपये) तक के वीजा बॉन्ड की शर्त को स्थायी बना दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से फेडरल रजिस्टर में जारी अधिसूचना के अनुसार यह नियम 3 अगस्त 2026 से लागू हो गया है। हालांकि भारतीय नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल भारत इस सूची में शामिल नहीं है, इसलिए भारतीय आवेदकों पर यह नियम लागू नहीं होगा।
पायलट योजना से स्थायी नियम तक का सफर
अमेरिका ने इस वीजा बॉन्ड योजना की शुरुआत वर्ष 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की थी। इस दौरान चयनित देशों के कुछ वीजा आवेदकों से सुरक्षा राशि के रूप में बॉन्ड जमा कराने का प्रावधान रखा गया था। अब इस योजना को स्थायी रूप दे दिया गया है। नए नियम के तहत सूचीबद्ध 50 देशों के नागरिकों से बी-1 और बी-2 वीजा के लिए आवेदन करते समय अधिकतम 20,000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा कराया जा सकता है। हालांकि यह राशि हर आवेदक से नहीं ली जाएगी। अंतिम निर्णय संबंधित अमेरिकी कांसुलर अधिकारी की समीक्षा के आधार पर होगा।
US Visa News: किन देशों पर लागू होगा नया नियम
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी सूची में अधिकांश देश अफ्रीका के हैं। इसके अलावा भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के नागरिक भी इस नियम के दायरे में आएंगे। फिलहाल भारत को इस सूची से बाहर रखा गया है, जिससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारी यात्रियों को तत्काल किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस सूची का विस्तार किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि वीजा बॉन्ड प्रणाली से वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुकने की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि इस व्यवस्था से वैध कारोबारी और पर्यटक यात्रियों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी राशि के बॉन्ड की शर्त कई वास्तविक यात्रियों के लिए अमेरिका की यात्रा को महंगा और जटिल बना सकती है। फिलहाल भारतीय नागरिक इस नियम से बाहर हैं, लेकिन भविष्य में अमेरिकी नीति में किसी भी बदलाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
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