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1 मई पर बैशाख पूर्णिमा, दुर्लभ संयोग में बन रहे शुभ मुहूर्त, जानें पूजा, दान और सही समय

Vaishakh Purnima: सनातन धर्म में पंचांग का बहुत अहम स्थान है। पंचांग के पांच मुख्य भाग तिथि, वार, योग, करण और नक्षत्र के आधार पर ही दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है। 1 मई को वैशाख पूर्णिमा है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार बहुत पवित्र और शुभ मानी जाती है। इस दिन धार्मिक कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है। शुक्रवार को पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, जिससे पूरे दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय

इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 56 मिनट पर। चंद्रमा का उदय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन यानी 2 मई को सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगा। ये सभी समय पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

Vaishakh Purnima: वैशाख पूर्णिमा 2026
वैशाख पूर्णिमा 2026

नक्षत्र और योग की स्थिति

वैशाख पूर्णिमा के दिन स्वाती नक्षत्र रहेगा, जो 2 मई की सुबह 4 बजकर 35 मिनट तक चलेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। वहीं सिद्धि योग शाम 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, यह योग शुभ कार्यों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

Vaishakh Purnima: शुभ मुहूर्त का संयोग

इस दिन खास बात यह है कि अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त दोनों एक ही दिन में पड़ रहे हैं, जो बहुत ही शुभ संयोग है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक और अमृत काल शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी शुभ कार्य करना बहुत लाभकारी माना जाता है।

अशुभ समय का ध्यान रखें

जहां शुभ समय का महत्व है, वहीं कुछ अशुभ समय भी होते हैं जिनमें कोई जरूरी काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दिन भद्रा सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 10 बजे तक रहेगी। राहुकाल सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

गुलिक काल सुबह 7 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 59 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। वहीं दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इन समयों में नए काम शुरू करने से बचना चाहिए।

वैशाख पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

वैशाख पूर्णिमा के दिन लोग स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देने जैसे कार्य करते हैं। इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए लोग पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं। खास बात यह है कि इसी दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, जो इसे और भी खास बना दे

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