Viral Success Story: देश के लाखों युवाओं के लिए बड़ी आईटी कंपनी में नौकरी पाना किसी सपने से कम नहीं होता। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसे शख्स की कहानी चर्चा में है, जिसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में चयन होने के बावजूद नौकरी जॉइन करने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया। दावा है कि जिस फैसले को शुरुआत में लोग उसके करियर की बड़ी गलती मान रहे थे, उसी फैसले ने आज उसे सफल कारोबारी बना दिया है। अब वह चावल के कारोबार से सालाना करीब 25 लाख रुपये की कमाई कर रहा है।
TCS में हुआ चयन, लेकिन नौकरी की जगह चुना बिजनेस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Ankit Pandey नाम के एक यूजर ने अपने दोस्त की यह कहानी शेयर की है। पोस्ट के मुताबिक, उनके दोस्त का चयन TCS में हुआ था, लेकिन उसने कंपनी जॉइन नहीं की। उसने नौकरी करने के बजाय अपना खुद का बिजनेस खड़ा करने का फैसला लिया।उस वक्त आसपास के कई लोगों को उसका यह फैसला सही नहीं लगा। लोगों का मानना था कि एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी की नौकरी छोड़ना करियर के लिहाज से बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। हालांकि पोस्ट में दावा किया गया है कि आज वही शख्स अपने चावल के कारोबार से सालाना करीब 25 लाख रुपये कमा रहा है।
किसानों से सीधे खरीदता है चावल
इस बिजनेस मॉडल की सबसे खास बात चावल की खरीद और उसकी सप्लाई का तरीका बताया गया है। पोस्ट के मुताबिक, कारोबारी अलग-अलग गांवों और राज्यों में किसानों से सीधे चावल खरीदता है। इसके बाद चावल की सफाई कराई जाती है और उसे अपने ब्रांड के नाम से पैक कराया जाता है।
पैकिंग के बाद तैयार चावल को सीधे रिटेल दुकानदारों तक पहुंचाया जाता है। दावा है कि कारोबारी ने करीब 200 रिटेल दुकानों का नेटवर्क तैयार कर लिया है, जहां नियमित रूप से उसके ब्रांड का चावल सप्लाई किया जाता है।
40 रुपये की लागत, 50 रुपये किलो में बिक्री
वायरल पोस्ट में इस कारोबार की लागत और मुनाफे का हिसाब भी बताया गया है। इसके अनुसार, चावल की खरीद करीब 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से होती है। पैकेजिंग पर करीब 3 रुपये और परिवहन पर लगभग 2 रुपये प्रति किलो का खर्च आता है। इस हिसाब से चावल की कुल लागत करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है।इसके बाद यही चावल रिटेल दुकानदारों को करीब 50 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है। दुकानदार इसे ग्राहकों को लगभग 55 से 57 रुपये प्रति किलो में बेचते हैं। इस गणना के आधार पर कारोबारी का ग्रॉस मार्जिन करीब 10 रुपये प्रति किलो बैठता है।
हर महीने 20 हजार किलो चावल की सप्लाई का दावा
पोस्ट में दावा किया गया है कि कारोबारी हर महीने करीब 200 क्विंटल यानी 20,000 किलोग्राम चावल अपने रिटेल नेटवर्क में सप्लाई करता है। अगर प्रति किलो 10 रुपये के बताए गए मार्जिन को आधार बनाया जाए, तो यह रकम करीब 2 लाख रुपये महीने बैठती है।इसी हिसाब से सालाना आंकड़ा करीब 24 लाख रुपये तक पहुंचता है, जिसे वायरल पोस्ट में लगभग 25 लाख रुपये सालाना कमाई के रूप में बताया गया है। हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रति किलो मार्जिन को सीधे शुद्ध मुनाफा मानना सही नहीं होगा, क्योंकि कारोबार में कई अन्य खर्च भी हो सकते हैं।
वायरल कहानी पर उठे कई सवाल
सोशल मीडिया पर यह कहानी सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने बड़ी कंपनी की नौकरी के बजाय कारोबार चुनने के फैसले की तारीफ की और कहा कि अपना बिजनेस खड़ा करने के लिए जोखिम लेने का साहस जरूरी होता है।वहीं कुछ यूजर्स ने वायरल पोस्ट में बताए गए आंकड़ों पर सवाल भी उठाए। लोगों ने पूछा कि किसानों से धान या चावल खरीदने के बाद मिलिंग और प्रोसेसिंग का खर्च किस तरह जोड़ा गया है। इसके अलावा वेयरहाउस, मजदूरी, खराब स्टॉक, दुकान तक डिलीवरी, टैक्स और कारोबार चलाने से जुड़े दूसरे खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए गए।कुछ यूजर्स का कहना था कि 200 दुकानों का नेटवर्क तैयार करना भी अपने आप में आसान काम नहीं है और इसके लिए पूंजी, सप्लाई चेन तथा बाजार की अच्छी समझ की जरूरत होती है।
नौकरी से अलग रास्ता चुनने की कहानी बनी चर्चा का विषय
फिलहाल इस वायरल दावे के सभी कारोबारी आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर शेयर की गई यह कहानी लोगों का ध्यान जरूर खींच रही है। एक तरफ इसे सुरक्षित नौकरी के बजाय कारोबार चुनने और जोखिम उठाने की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ लोग इसके वास्तविक खर्च और शुद्ध मुनाफे का हिसाब भी पूछ रहे हैं।यह कहानी इतना जरूर बताती है कि नौकरी और बिजनेस में सफलता का कोई एक तय रास्ता नहीं होता। सही बाजार, मजबूत सप्लाई नेटवर्क और ग्राहकों की लगातार मांग मिलने पर पारंपरिक दिखने वाला चावल का कारोबार भी बड़े स्तर पर पहुंच सकता है।
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