West Bengal: पश्चिम बंगाल में विद्यालयों की मध्याह्न भोजन योजना को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा इस्कॉन को मध्याह्न भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने बच्चों के भोजन से अंडे हटाए जाने की आशंका जताई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार को इस विषय पर दोबारा विचार करना चाहिए।
अंडे हटने की आशंका पर तृणमूल की आपत्ति
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुणाल घोष ने कहा कि यदि मध्याह्न भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी एक धार्मिक संस्था को सौंपी जाती है, तो भोजन की प्रकृति पूरी तरह शाकाहारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालयों में बच्चों को अंडे भी दिए जाते हैं, जो उनके पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में यदि भोजन सूची से अंडे हटा दिए जाते हैं तो इसका असर बच्चों के पोषण स्तर पर पड़ सकता है।
West Bengal: सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
तृणमूल विधायक ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना को किसी धार्मिक संस्था से नहीं जोड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यह योजना बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए इसमें सभी आवश्यक खाद्य पदार्थ शामिल रहने चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह इस निर्णय की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि बच्चों के पोषण से कोई समझौता न हो।
इस्कॉन को सौंपी जा रही है जिम्मेदारी
राज्य की नई सरकार ने विद्यालयी छात्रों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी इस्कॉन को देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी निर्णय के बाद यह बहस शुरू हुई है कि भविष्य में भोजन की व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे। तृणमूल नेताओं का दावा है कि इस्कॉन द्वारा भोजन तैयार किए जाने की स्थिति में भोजन पूरी तरह शाकाहारी हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
West Bengal: पार्टी के बागी नेताओं पर भी साधा निशाना
मध्याह्न भोजन विवाद के साथ-साथ कुणाल घोष ने तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो विधायक आज पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं, वे उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। घोष ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज इस बात का प्रमाण हैं कि उन्हें पार्टी नेतृत्व के समर्थन से चुनाव लड़ने का अवसर मिला था। उन्होंने बागी नेताओं के दावों को विरोधाभासी बताते हुए पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा की बात दोहराई।
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