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बंगाल में TMC में बड़ी टूट की अटकलें, 50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आने की चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी से निष्कासित दो नेताओं को लेकर अब नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि कुछ नाराज विधायक खुद को “असली TMC” बताते हुए अलग संगठन बनाने की तैयारी में हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की राजनीति में इन चर्चाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा

जानकारी के अनुसार, पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कुछ विधायकों के साथ बैठक की है। सूत्रों के मुताबिक, उनके समर्थकों का दावा है कि 50 से अधिक विधायक उनके संपर्क में हैं। इसी के साथ विपक्ष के नेता के पद और पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर भी दावेदारी की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे TMC के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

West Bengal Politics: शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे TMC विधायक

इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना से जुड़े प्रशासनिक मामलों को लेकर एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक शामिल हुए। बैठक में शामिल होने वाले नेताओं में जावेद खान, फिरहाद हकीम, नयना दास बनर्जी, कुणाल घोष, ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा, अशोक देव, अरुणाभा सेन, समीर पांजा, प्रिया पाल, गुलशन मल्लिक, तापस मैती, नीलिमा मिस्त्री, अब्दुल खालेक मोल्लाह, बहारुल इस्लाम, परेशराम दास, जॉयदेव हलदर और समीर जाना के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

West Bengal Politics: ममता बनर्जी का बड़ा फैसला

बढ़ते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। पार्टी ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियों और सहयोगी संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जा रहा है। पार्टी के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संगठन के सभी स्तरों पर प्रदर्शन की समीक्षा, आत्ममंथन और मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद संगठन का पुनर्गठन कर नई संरचना की घोषणा की जाएगी। पार्टी का कहना है कि यह कदम भविष्य की चुनौतियों का मजबूती से सामना करने और संगठन को फिर से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

आखिर क्यों उठ रही हैं टूट की चर्चाएं?

West Bengal Politics: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच पूर्व नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि पश्चिम बंगाल में TMC की स्थिति महाराष्ट्र की शिवसेना जैसी हो सकती है। वहीं मंत्री तापस रॉय के कुछ बयानों के बाद भी पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं को और बल मिला है। हालांकि TMC नेतृत्व की ओर से अभी तक किसी बड़े विभाजन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी के पुनर्गठन और विधायकों की राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

 

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