West bengal: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच ‘गोरखालैंड’ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के गंगारामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर बीजेपी का रुख साफ किया। अमित शाह ने कहा कि अगर बीजेपी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है, तो दार्जिलिंग की पहाड़ियों में रहने वाले गोरखा समुदाय की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
संवैधानिक तरीके से समाधान का वादा
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह समाधान राज्य का विभाजन किए बिना और पूरी तरह संवैधानिक तरीके से किया जाएगा। रैली के दौरान शाह ने यह भी बताया कि बीजेपी अपने घोषणापत्र में उत्तर बंगाल के विकास के लिए कई योजनाएं लेकर आई है। इनमें पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण-अनुकूल एडवेंचर स्पोर्ट्स हब, साथ ही बड़े शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान खोलने जैसे वादे शामिल हैं।
West bengal: गोरखालैंड मुद्दे का इतिहास
गौरतलब है कि गोरखालैंड की मांग लंबे समय से उठती रही है और इसको लेकर कई बार आंदोलन भी हो चुके हैं। हालांकि, 2011 में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) बनने के बाद भी यह मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हुआ। अमित शाह ने अपनी रैली में तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी जमकर निशाना साधा।
विकास और कानून-व्यवस्था पर जोर
West bengal: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसी समस्याएं बढ़ी हैं, जिन्हें बीजेपी सत्ता में आने पर खत्म करेगी। इसके अलावा उन्होंने उत्तर बंगाल के विकास के लिए AIIMS, कैंसर अस्पताल, IIT, IIM और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जैसे बड़े संस्थान स्थापित करने का भी वादा किया। साथ ही किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए अन्य राज्यों में आलू की आपूर्ति की सुविधा देने की बात भी कही। चुनाव से पहले गोरखालैंड का मुद्दा फिर से गर्माने लगा है, ऐसे में बीजेपी का यह बयान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
Written by: Kanishka Ram
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