India : भारत अपनी संस्कृति के लिए देश भर में प्रख्यात है । भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है और इसी कड़ी में आपको बता दें कि भारत ने दुनिया को अलग अलग रंग भी दिए हैं।
आईए इनके इतिहास के बारे में थोड़ा और जानते हैं। हम हल्दी की जड़ को भले ही इसकी औषधीय खूबियों के लिए जानते हों, लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता के लोग इसका इस्तेमाल एक बेहद खूबसूरत और चमकदार पीला रंग बनाने के लिए करते थे।

चाहे आम पहनने वाले कपड़े हों या पूजा-पाठ के वस्त्र, हर जगह इस रंग का उपयोग होता था। यह चमकता हुआ सुनहरा रंग प्राचीन भारत की आध्यात्मिकता, शुद्धता और धूप जैसी ताजगी को दर्शाता था।
India: ब्लू गोल्ड इंडिगो
आज आप जो आधुनिक डेनिम पहनते हैं, उसकी नींव प्राचीन भारत में ‘इंडिगोफेरा टिंक्टोरिया’ के पौधे से ही पड़ी थी। उस समय बड़े कुंडों के भीतर इसकी हरी पत्तियों को एक सम्मोहक गहरे नीले रंग में बदला जाता था। कपड़े के इतिहास में इस रंग ने ऐसी क्रांति ला दी कि रोमन सम्राट भी इसके मुरीद हो गए थे। इसी ‘नीले सोने’ ने आगे चलकर पूरी दुनिया के कपड़ा व्यापार को एक नई दिशा दी।
अखरोट का भूरा रंग
मुगल दौर में ऊनी शॉलों और शाही दरबार के कीमती कालीनों को रंगने के लिए अखरोट के पेड़ की पत्तियों और छिलकों का जमकर इस्तेमाल होता था। प्राकृतिक रूप से टैनिन से भरपूर होने के कारण, यह काले और भूरे रंग के बहुत ही सधे हुए और टिकाऊ शेड देता था। इससे कपड़ों में एक अलग ही शाही लुक और गहराई आ जाती थी।
लाल-भूरी मेहंदी
लॉसोनिया इनर्मिस पौधे की पत्तियों से बनने वाली मेहंदी मुगल काल के दौरान शाही विलासिता का अहम हिस्सा बन गई थी। यह न सिर्फ बालों को एक प्यारा लाल-भूरा रंग देने के काम आती थी, बल्कि शरीर पर सुंदर कलाकृतियां बनाने के लिए भी बहुत लोकप्रिय थी। अपने गहरे, उत्सवी रंग और ठंडक पहुंचाने वाले गुण के कारण यह मुगल दरबारों की शान मानी जाती थी।
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Written By : Anushka








