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कौन हैं मंसूर अब्बास, जिनके हाथ में है इजराइल की सत्ता की चाबी? नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किल

Israel Election 2026:  इजराइल के चुनावी नतीजों के बाद सरकार बनाने का गणित दिलचस्प हो गया है। शुरुआती अनुमानों में अरब नेतृत्व वाली दो प्रमुख पार्टियों को करीब 19 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अरब-इस्लामी पार्टी राअम के प्रमुख मंसूर अब्बास की भूमिका चर्चा में है। आखिर कौन हैं मंसूर अब्बास और कैसे वह इजराइल की गठबंधन राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंचे हैं? समझिए पूरा मामला।

इजराइल की राजनीति में सरकार बनाना आसान नहीं है। यहां की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद शुरुआती अनुमानों में किसी भी बड़े राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। इसी वजह से अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

इन पार्टियों में मंसूर अब्बास की राअम भी शामिल है। अब्बास की रणनीति पारंपरिक अरब राजनीति से कुछ अलग रही है। वह इजराइल की राजनीतिक व्यवस्था से दूरी बनाए रखने के बजाय उसमें भागीदारी करके अरब समुदाय के लिए बजट, विकास और सरकारी सुविधाएं हासिल करने पर जोर देते हैं।

कौन हैं मंसूर अब्बास?

मंसूर अब्बास पेशे से दंत चिकित्सक हैं और इजराइल के उत्तरी हिस्से में स्थित मघर शहर से आते हैं। वह वर्ष 2019 में पहली बार इजराइल की संसद नेसेट के सदस्य चुने गए थे। फिलहाल वह यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राअम पार्टी का नेतृत्व करते हैं। यह पार्टी इजराइल के इस्लामिक मूवमेंट की दक्षिणी शाखा से जुड़ी है।

मंसूर अब्बास की राजनीति का प्रमुख आधार इजराइल में रहने वाले अरब नागरिकों की समस्याएं हैं। वह मानते हैं कि केवल विरोध की राजनीति करने से समुदाय की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए सरकार और संसद की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी जरूरी है। उनकी प्राथमिकताओं में अरब बहुल इलाकों में संगठित अपराध पर नियंत्रण, आवास की समस्या, बुनियादी सुविधाओं का विकास और सरकारी बजट में उचित हिस्सेदारी जैसे मुद्दे शामिल हैं।

Israel Election 2026: मंसूर अब्बास की राजनीति दूसरे अरब दलों से कितनी अलग है?

इजराइल की अरब पार्टियों के बीच सरकार के साथ जुड़ने को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। कुछ दल फिलिस्तीनी मुद्दे और इजराइली सरकार की नीतियों के विरोध को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाते हैं। वहीं मंसूर अब्बास का जोर व्यावहारिक राजनीति और संसदीय भागीदारी पर है।

उनका मानना है कि सरकार से पूरी तरह बाहर रहने पर अरब समुदाय की मांगों को फैसलों में बदलना मुश्किल हो सकता है। इसके उलट, गठबंधन सरकार को समर्थन देकर या उसमें शामिल होकर बजट आवंटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अपराध नियंत्रण जैसे मुद्दों पर ठोस फैसले करवाए जा सकते हैं। यही वजह है कि अब्बास की पार्टी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग विचारधाराओं वाले राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने की रणनीति अपनाती रही है।

2021 में क्या था मंसूर अब्बास का ऐतिहासिक फैसला?

मंसूर अब्बास की राजनीति में जून 2021 का साल बेहद अहम माना जाता है। उस समय उनकी पार्टी राअम ने नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया था। इस गठबंधन में शामिल होकर राअम इजराइल की सरकार का हिस्सा बनने वाली पहली स्वतंत्र अरब पार्टी बनी।

इस फैसले ने इजराइल की राजनीति में बड़ा बदलाव किया। गठबंधन के समर्थन से बेंजामिन नेतन्याहू का लगातार करीब 12 वर्षों से चला आ रहा प्रधानमंत्री कार्यकाल समाप्त हुआ। अब्बास के लिए यह केवल सत्ता में भागीदारी का फैसला नहीं था। इसके जरिए उन्होंने अरब समुदायों के विकास के लिए सरकारी बजट और योजनाओं से जुड़ी प्रतिबद्धताएं हासिल करने की कोशिश की। इनमें आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और संगठित अपराध से निपटने जैसे मुद्दे शामिल थे।

हालांकि, यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चल सका। अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक प्राथमिकताओं के कारण गठबंधन में मतभेद बढ़े और वर्ष 2022 में सरकार गिर गई। इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाना और सरकार को लंबे समय तक चलाना कितना चुनौतीपूर्ण है।

Israel Election 2026
                                                                  Israel Election 2026
2026 के चुनाव में मंसूर अब्बास की भूमिका क्यों अहम?

इस बार के चुनाव के बाद शुरुआती अनुमानों में अरब नेतृत्व वाली दो प्रमुख पार्टियों को मिलाकर करीब 19 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत है। ऐसे में इन पार्टियों का समर्थन सरकार बनाने के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

मंसूर अब्बास की राअम और जॉइंट लिस्ट की रणनीति में अंतर बताया जा रहा है। राअम सरकार के औपचारिक गठबंधन में शामिल होने की संभावना पर जोर देती रही है, जबकि जॉइंट लिस्ट की ओर से सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी सामने रखा जाता है।

हालांकि, इन दोनों दलों की सीटों को मंसूर अब्बास की व्यक्तिगत ताकत मानना सही नहीं होगा। सरकार गठन में उनकी भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि उनकी पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं और वह दूसरे दलों के साथ किस तरह का समझौता कर पाती है।

Israel Election 2026: नेतन्याहू के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?

चुनाव के बाद यदि किसी भी राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार बनाने के लिए छोटे दलों और संभावित सहयोगियों का समर्थन जरूरी हो जाएगा। ऐसे हालात में अरब पार्टियों के सांसदों की भूमिका बढ़ सकती है।

मंसूर अब्बास पहले भी यह संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी सरकार में भागीदारी के लिए तैयार है। लेकिन गठबंधन में शामिल होने के लिए केवल राअम की सहमति पर्याप्त नहीं होगी। दूसरे दलों की विचारधारा, अरब पार्टियों के साथ सहयोग को लेकर उनकी राजनीतिक स्थिति और मतदाताओं की प्रतिक्रिया भी अहम होगी। यही समीकरण नेतन्याहू के लिए चुनौती बन सकता है। यदि उनके विरोधी दल अरब सांसदों का समर्थन हासिल करने में सफल होते हैं, तो सरकार गठन का रास्ता बदल सकता है। दूसरी ओर, यदि गठबंधन के सहयोगी अरब पार्टियों के साथ औपचारिक समझौते पर सहमत नहीं होते, तो बहुमत का गणित मुश्किल बना रह सकता है।

क्या मंसूर अब्बास तय करेंगे इजराइल का अगला प्रधानमंत्री?

मंसूर अब्बास की भूमिका को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इजराइल में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। जनता नेसेट के सदस्यों को चुनती है और फिर संसद में बहुमत का समर्थन जुटाने वाला गठबंधन सरकार बनाता है। ऐसे में मंसूर अब्बास और उनकी पार्टी सरकार गठन की बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला अकेले वही करेंगे। अंतिम स्थिति चुनाव के आधिकारिक नतीजों और गठबंधन वार्ताओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

कुल मिलाकर, मंसूर अब्बास की राजनीति इजराइल में अरब समुदाय की संसदीय भागीदारी और व्यावहारिक गठबंधन रणनीति का उदाहरण है। 2026 के चुनाव के बाद उनकी पार्टी कितनी सीटें हासिल करती है और दूसरे दलों के साथ किस तरह का समझौता करती है, यही तय करेगा कि सत्ता के समीकरण में उनकी भूमिका कितनी बड़ी होगी।

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