Lucknow MLC Election: ज्योतिषाचार्य आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा को लखनऊ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा अपनी भविष्यवाणियों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनकी पत्नी को चुनाव में 300 वोट भी नहीं मिले। इस नतीजे के बाद सोशल मीडिया पर लोग आचार्य इंदु प्रकाश की भविष्यवाणियों को लेकर सवाल उठाने लगे।
Lucknow MLC Election: कांग्रेस में शामिल हुई थीं स्मिता मिश्रा
स्मिता मिश्रा 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी। अजय राय ने उन्हें लखनऊ खंड स्नातक सीट से चुनाव लड़ाने का भरोसा दिया था। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और उनकी जगह आराधना मिश्रा ‘मोना’ को जिम्मेदारी सौंपी गई। नए नेतृत्व ने स्मिता मिश्रा को एमएलसी चुनाव का टिकट नहीं देने का फैसला किया। इसके बावजूद स्मिता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें 300 वोट भी नहीं मिल सके।
चुनाव प्रचार में की थी पूरी मेहनत
स्मिता मिश्रा ने चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने स्नातकों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों के बीच जाकर जनसंपर्क किया। इसके अलावा अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन भी प्रकाशित करवाए। उनके चुनाव अभियान को नवयुवक दल, करणी सेना और स्थानीय ब्रह्म समाज समेत कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला था। इसके बावजूद वह चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकीं।
Lucknow MLC Election: सोशल मीडिया पर आचार्य इंदु प्रकाश को किया ट्रोल
स्मिता मिश्रा की हार के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके पति आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा को लेकर कई टिप्पणियां कीं। लोगों ने कहा कि जो ज्योतिषाचार्य दूसरों का भविष्य बताते हैं, वे अपनी पत्नी की चुनावी किस्मत का अंदाजा नहीं लगा सके। कुछ लोगों ने यह भी सवाल किया कि जब वह दूसरों को परेशानियों से बचने के लिए कई तरह के उपाय और टोटके बताते हैं, तो उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव में सफलता पाने का कोई उपाय क्यों नहीं बताया? इस पर स्मिता मिश्रा ने कहा कि उन्होंने अपने पति से कभी अपने चुनावी भविष्य के बारे में नहीं पूछा था। उन्होंने बताया कि उनके घर पर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े लोग आते हैं और उनके पति के बताए उपाय अपनाकर कई लोगों को सफलता भी मिली है। हालांकि, स्मिता ने कहा कि वह एमएलसी चुनाव सत्ता का सुख पाने के लिए नहीं लड़ रही थीं। उनका उद्देश्य जनसेवा और परोपकार करना था।
वेबसाइट पर दर्ज हैं आचार्य इंदु प्रकाश की प्रमुख भविष्यवाणियां
आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की वेबसाइट पर उनकी 7 प्रमुख भविष्यवाणियों का उल्लेख किया गया है। इनमें नेल्सन मंडेला की रिहाई, सोवियत संघ का बिखराव और 11 सितंबर को ट्विन टावर पर हुआ हमला शामिल हैं। इसके अलावा भारत का 7 रनों से विश्व कप जीतना और 11 नवंबर को कल्याण सिंह का मुख्यमंत्री पद से हटना भी इस सूची में शामिल है। वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की थी कि कल्याण सिंह की जगह ‘र’ अक्षर से नाम शुरू होने वाला वैश्य समुदाय का व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा। उनकी सबसे हालिया बताई गई भविष्यवाणी 8 नवंबर 2025 को आए भूकंप से जुड़ी है। वेबसाइट के अनुसार, इसकी जानकारी उन्होंने 25 अक्टूबर को ही दे दी थी।
Lucknow MLC Election: चुनाव में धांधली का स्मिता मिश्रा ने लगाया आरोप
अपनी हार को लेकर स्मिता मिश्रा ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग हुई और उनके एजेंट को मतदान केंद्र के अंदर बैठने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उनके सामने ही एजेंट को डांटकर बाहर निकाल दिया।स्मिता के मुताबिक, उन्होंने 2 साल तक चुनाव की तैयारी की थी। इस दौरान वह 37 तहसीलों के स्कूलों और कॉलेजों में गईं और शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा स्नातकों से संपर्क किया। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके समर्थकों को वोटर बनने से रोका। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को मतदान नहीं करने दिया गया और मतदाता सूची में गड़बड़ी के साथ फर्जी मतदान भी हुआ।उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस मामले में सवाल उठाया तो एसडीएम ने उनसे पूछा कि किस नियमावली में लिखा है कि बूथ के अंदर एजेंट बैठ सकता है। स्मिता का कहना है कि उनके एजेंट को बैठने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
चुनाव में पैसे बांटने का भी लगाया आरोप
स्मिता मिश्रा ने चुनाव में पैसों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ मतदाताओं को वोट देने के बदले पैसे दिए जाने की शिकायतें मिली थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोग मतदान कर रहे हैं, तो इस तरह की स्थिति पर क्या कहा जा सकता है।
Lucknow MLC Election: 22 हजार फॉर्म भरने के बाद भी वोटर लिस्ट में नहीं जुड़े नाम
स्मिता मिश्रा ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उनके समर्थकों ने ऑनलाइन करीब 22 हजार फॉर्म भरे थे, लेकिन इन फॉर्मों को जमा करने के बावजूद मतदाता सूची में नाम शामिल करने को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।उन्होंने बाराबंकी के इकरा गांव का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां मतदाता सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम शामिल थे, जिनका उस गांव से कोई संबंध नहीं था। स्मिता के मुताबिक, जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो उन्हें बताया गया कि पोर्टल बंद हो चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग को 100 से अधिक शिकायतें भेजी गईं, लेकिन किसी का भी जवाब नहीं मिला।
2027 के विधानसभा चुनाव में उतारेंगी 50 उम्मीदवार
स्मिता मिश्रा ने कहा कि एक समय उन्हें भाजपा पर भरोसा था, लेकिन चुनाव में कथित अनियमितताओं से उन्हें निराशा हुई है। अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी नवयुवक दल कम से कम 50 उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का गठन 2014 में हुआ था। निर्भया कांड के समय पार्टी ने आंदोलन किया था। अब पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इसके लिए कई लोगों से बातचीत चल रही है। स्मिता ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान करणी सेना समेत कई सामाजिक संगठनों ने उनका समर्थन किया था। आने वाले चुनाव को लेकर इन संगठनों से भी बातचीत की जाएगी।
Lucknow MLC Election: हार के बाद भी जारी रखेंगी समाज सेवा
स्मिता मिश्रा ने कहा कि चुनाव में हार मिलने के बावजूद उनका सामाजिक काम बंद नहीं होगा। आईपी फाउंडेशन के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षकों की मदद और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने का काम जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा और वह इस मुद्दे पर अपना अभियान चलाती रहेंगी।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से है स्मिता मिश्रा का संबंध
स्मिता मिश्रा का मायका उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के कुरारी गांव में है, जबकि उनका ससुराल बाराबंकी जिले के इकरा गांव में है। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। उनकी दोनों बेटियां कनाडा में रहती हैं, जबकि बेटा गुड़गांव में रहता है।स्मिता के पिता रामसुंदर नाथ शुक्ला पुलिस अधिकारी थे। उन्हें 26 मेडल मिले थे। इसके अलावा उन्हें एक विशेष पुरस्कार भी दिया गया था, जिसके तहत वह जीवनभर वर्दी पहनकर परेड में शामिल हो सकते थे। वहीं, उनके दादा शंभू रतन शुक्ला स्वतंत्रता सेनानी थे और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी भी रह चुके थे।








