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छत्तीसगढ़ में 400 नेताओं की सुरक्षा होगी कम, सरकार का फैसला; कांग्रेस ने जताई चिंता

Chhattisgarh Leaders Security:

Chhattisgarh Leaders Security: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म होने के सरकार के दावे के बाद अब जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में कटौती की जाएगी। राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से करीब 400 नेताओं की सुरक्षा कम करने का फैसला लिया है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। वहीं, कांग्रेस ने इस फैसले पर चिंता जताई है और सरकार से जल्दबाजी नहीं करने की अपील की है।

Chhattisgarh Leaders Security: 400 नेताओं को मिली है विशेष सुरक्षा

छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा के खतरे को देखते हुए सरपंच से लेकर सांसद तक करीब 400 जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं को विशेष सुरक्षा दी गई है। इनकी सुरक्षा में कम से कम 1,500 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 55 नेताओं को जेड और जेड प्लस, 90 नेताओं को वाई और वाई प्लस, 165 नेताओं को एक्स और 90 नेताओं को एक्स-2 श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।

Chhattisgarh Leaders Security: धीरे-धीरे कम की जाएगी सुरक्षा

राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के तहत 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की गई थी। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए छह महीने तक इंतजार किया। विजय शर्मा ने कहा, “31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय करके एक इंसर्जेंसी समाप्त की गई। समाप्त होने के तुरंत बाद आप सुरक्षा हटा लें, ये न्यायोचित नहीं है। 6 महीने देखा गया। उसी व्यवस्था में सब चले हैं। अब 6 महीने के बाद पूरा हटा देंगे, ये भी संभव नहीं है।” उन्होंने बताया कि सुरक्षा श्रेणियों में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले कुछ नेताओं को जेड और जेड श्रेणी वालों को वाई प्लस श्रेणी में किया गया है। इसी तरह वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा पाने वालों को वाई श्रेणी में लाया गया है। गृह मंत्री के मुताबिक, सुरक्षा में एक ग्रेड की कटौती की गई है। आने वाले समय में फिर एक ग्रेड कम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त करना है।

कांग्रेस ने सुरक्षा घटाने पर जताई चिंता

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने राज्य सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। बस्तर के आदिवासी नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि राज्य में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ नक्सली दबाव के कारण दूसरे राज्यों में चले गए हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा कम करने से पहले स्थिति का दोबारा आकलन किया जाना चाहिए। दीपक बैज ने कहा कि यदि सरकार सुरक्षा में कटौती करने का फैसला लेती है, तो उसे जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

सुरक्षा कम करने से पहले आकलन की मांग

छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा बस्तर समेत माओवादी हिंसा प्रभावित इलाकों की स्थिति से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था में चरणबद्ध तरीके से बदलाव करने के पक्ष में है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि सुरक्षा कम करने से पहले जमीनी हालात का सही आकलन जरूरी है। अब इस फैसले के तहत आने वाले समय में नेताओं की सुरक्षा में और कटौती की जा सकती है।

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