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डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों को क्यों नहीं मिलेगी कोर्ट द्वारा आसानी से जमानत? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती समझिए

Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों को कोर्ट से नहीं मिलेगी जमानत?

Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस तरह की धोखाधड़ी को गंभीर अपराध बताते हुए आरोपियों को जमानत दिए जाने पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई लूटना डिजिटल डकैती जैसा है। इस मामले में एक बुजुर्ग व्यक्ति से बड़ी रकम की ठगी और आरोपियों के खिलाफ कई राज्यों में दर्ज मामलों का भी उल्लेख हुआ। अदालत की टिप्पणियों से संकेत मिला कि ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखना जरूरी है।

डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए की जाने वाली साइबर ठगी पर गंभीर चिंता जताई। इस तरह के मामलों में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। इसके बाद पीड़ितों पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है। अदालत ने इस तरह की धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए।

Digital Arrest: डिजिटल डकैती से की अपराध की गंभीरता स्पष्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों की जमा-पूंजी हड़पने की घटनाओं को ‘डिजिटल डकैती’ बताया। इस तरह के अपराधों में कई बार पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखकर बड़ी रकम वसूली जाती है। साइबर ठग वीडियो कॉल और फर्जी कानूनी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके लोगों को विश्वास में लेते हैं।

बुजुर्ग से 1.90 करोड़ रुपये की ठगी का मामला

सुनवाई में 81 वर्षीय बुजुर्ग से कथित तौर पर 1.90 करोड़ रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई इस तरह की धोखाधड़ी में पीड़ितों को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। बड़ी रकम की ठगी के मामलों में अदालत ने अपराध की गंभीरता और पीड़ितों को हुए नुकसान को लेकर चिंता जताई।

Digital Arrest: आरोपियों के खिलाफ कई राज्यों में मामले

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों का भी जिक्र हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों पर 35 मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं। अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज होने से जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों को जमानत देने के मुद्दे पर सख्त टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान यह संकेत दिया गया कि ऐसे गंभीर अपराधों में जमानत पर विचार करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। हालांकि, अदालत की टिप्पणी को सभी मामलों में जमानत पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता।

Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?

डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग अक्सर खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहना गंभीर धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में पैसे भेजने से बचें, संदिग्ध कॉल और संदेशों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और पुलिस या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

 

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