Drug Mafia: ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। ड्रग्स सिंडिकेट के कथित सरगना और भगोड़े आरोपी वीरेंद्र सिंह बैसोया को दुबई से भारत लाया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NCB) के मुताबिक, बैसोया के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था और उसे UAE में गिरफ्तार किए जाने के बाद भारत डिपोर्ट किया गया।
नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी साझा करते हुए बताया कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है। उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया।
Modi govt is relentlessly tracking down drug traffickers hiding abroad and destroying their entire ecosystem with a ruthless approach.
Creating a new milestone in the policy of zero tolerance against narcotics, the NCB secured the return of fugitive drug kingpin Virender Singh…
— Amit Shah (@AmitShah) August 14, 2026
वीरेंद्र बैसोया का नाम पुणे के करीब 6000 करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह कथित तौर पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा था। बताया गया है कि दिल्ली में सामने आए एक अन्य बड़े ड्रग्स मामले के आरोपी संदीप धुनिया से भी उसके करीबी संबंध रहे हैं। बैसोया को एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 4310 से भारत लाया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी और भारत वापसी से ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Drug Mafia: 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से खुला नेटवर्क
जांच के दौरान वीरेंद्र सिंह बैसोया का संबंध अवैध ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से सामने आया। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन की खेप लंदन भेजने की तैयारी की जा रही थी। पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पास से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया था। जांच में सामने आया कि बरामद मेफेड्रोन को कथित तौर पर डेल्टा लॉजिस्टिक्स के जरिए लंदन भेजने की तैयारी थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में वीरेंद्र सिंह बैसोया की कथित भूमिका और उसके निर्देश पर काम किए जाने की बात सामने आई। इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी 21 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
इस पूरे नेटवर्क में ड्रग्स की बड़ी खेप को देश से बाहर भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है। एजेंसियों के दस्तावेजों के अनुसार, वीरेंद्र बैसोया के बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी है और उसके विदेश में होने की जानकारी है। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने बयान में साफ किया कि ड्रग्स तस्कर दुनिया के किसी भी हिस्से में छिपे हों, भारतीय एजेंसियां उन तक पहुंचने की कोशिश जारी रखेंगी। बैसोया की भारत वापसी को इसी अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
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