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भारत की ‘तीन तरफ से घेराबंदी’ का खतरा कितना सच? मक्का पैक्ट में बांग्लादेश की एंट्री से क्या बदलेगा,जानिए पूरा समीकरण

FOREIGN NEWS: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद अब बांग्लादेश के संभावित जुड़ने की चर्चा ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक तस्वीर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, बांग्लादेश के इस समझौते में शामिल होने की अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ढाका इस गठबंधन का हिस्सा बनता है, तो इसका भारत की सुरक्षा, कूटनीति और समुद्री रणनीति पर कितना असर पड़ेगा?

क्या यह वाकई भारत के लिए तीन दिशाओं से बढ़ती रणनीतिक चुनौती होगी? पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ बांग्लादेश के जुड़ने से क्या बदल सकता है? और भारत इसका जवाब कैसे दे सकता है? आइए, सवाल-जवाब में समझते हैं।

सवाल-1: बांग्लादेश के मक्का पैक्ट में शामिल होने की चर्चा क्यों?

बांग्लादेश की ओर से इस समझौते में शामिल होने का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन वहां के मंत्रियों के हालिया बयानों के बाद इस संभावना पर चर्चा तेज हुई हैबांग्लादेश के विदेश मामलों से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ढाका किसी भी सुरक्षा समझौते पर फैसला अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर करेगा। यानी फिलहाल स्थिति “बांग्लादेश शामिल हो चुका है” वाली नहीं, बल्कि “बांग्लादेश संभावित सदस्य हो सकता है” वाली है।

FOREIGN NEWS: सवाल-2: अगर बांग्लादेश शामिल होता है तो उसे क्या फायदा हो सकता है?

बांग्लादेश के लिए ऐसे समझौते में आर्थिक और रणनीतिक फायदे तलाशे जा सकते हैं। सऊदी अरब से: निवेश, ऊर्जा और रोजगार के अवसर। तुर्किये से: रक्षा तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग। पाकिस्तान से: क्षेत्रीय और इस्लामिक मंचों पर कूटनीतिक सहयोग। लेकिन दूसरी तरफ जोखिम भी हैं। बांग्लादेश को भारत-पाकिस्तान तनाव, ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा और पश्चिम एशिया के संघर्षों में किसी एक पक्ष के करीब जाने का दबाव झेलना पड़ सकता है। इसलिए ढाका के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि उसे क्या मिलेगा, बल्कि यह भी होगा कि इस समझौते की रणनीतिक कीमत क्या होगी।

सवाल-3: भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या होगी?

अगर बांग्लादेश इस व्यवस्था का हिस्सा बनता है तो भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण एशिया में बदलता रणनीतिक समीकरण हो सकती है। पाकिस्तान भारत के पश्चिम में है और बांग्लादेश पूर्व में। तुर्किये और सऊदी अरब की भूमिका दक्षिण एशिया से बाहर पश्चिम एशिया और समुद्री मार्गों तक जाती है। इसलिए चार देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत होने की स्थिति में भारत को पश्चिम से लेकर पूर्व तक अपनी सुरक्षा रणनीति पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है। हालांकि, इसे सीधे “भारत की घेराबंदी” कहना अभी जल्दबाजी होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते में वास्तविक सैन्य सहयोग, खुफिया साझेदारी, सैन्य अड्डों या सामूहिक रक्षा की क्या व्यवस्था होती है

FOREIGN NEWS: सवाल-4: क्या पाकिस्तान को बांग्लादेश के जरिए भारत के खिलाफ रणनीतिक फायदा मिल सकता है?

संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल इसे तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की लंबी सीमा है और बंगाल की खाड़ी भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है. अगर भविष्य में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैन्य सहयोग काफी बढ़ता है, तो भारत को अपनी पूर्वी सीमा और बंगाल की खाड़ी में अतिरिक्त रणनीतिक सावधानी रखनी पड़ सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान को स्वतः बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति मिल जाएगी। इसके लिए अलग समझौते और स्पष्ट राजनीतिक-सैन्य निर्णय की जरूरत होगी।

सवाल-5: तुर्किये और सऊदी अरब की भूमिका भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यहां मामला सिर्फ सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि कूटनीति और अर्थव्यवस्था का भी है। सऊदी अरब भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा साझेदारों में है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वहां काम करते हैं और दोनों देशों के बीच निवेश तथा ऊर्जा संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर, तुर्किये ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है। इसलिए भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह एक तरफ सऊदी अरब जैसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ अपने रिश्ते मजबूत रखे और दूसरी तरफ तुर्किये-पाकिस्तान की रणनीतिक नजदीकी पर भी नजर रखे।

सवाल-6: भारत के लिए समुद्री मोर्चा कितना महत्वपूर्ण होगा?

अगर पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक रक्षा सहयोग बढ़ता है, तो हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का महत्व और बढ़ जाएगा। पाकिस्तान अरब सागर में स्थित है, जबकि बांग्लादेश बंगाल की खाड़ी में। वहीं सऊदी अरब लाल सागर और फारस की खाड़ी के बीच महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति में है और तुर्किये काला सागर तथा भूमध्य सागर के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता है। ऐसे में भारत के लिए नौसेना की निगरानी, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारियां अहम हो सकती हैं।

सवाल-7: भारत इस संभावित चुनौती का जवाब कैसे दे सकता है?

भारत के सामने तीन प्रमुख रास्ते हो सकते हैं।

पहला- कूटनीतिक संपर्क मजबूत करना। भारत को सऊदी अरब, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और अन्य देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत रखने होंगे। दूसरा- बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में समुद्री क्षमता बढ़ाना। भारत की सुरक्षा रणनीति में नौसेना और समुद्री निगरानी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। तीसरा- बांग्लादेश के साथ सीधे संबंधों पर जोर। अगर ढाका किसी नए सुरक्षा समूह के करीब जाता है, तब भी भारत के लिए जरूरी होगा कि वह बांग्लादेश के साथ व्यापार, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर संवाद बनाए रखे।

सवाल-8: क्या अभी भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बांग्लादेश ने अभी मक्का पैक्ट में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसके अलावा इस कथित रक्षा व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप, उसकी बाध्यताएं और सैन्य सहयोग की सीमा भी स्पष्ट होना जरूरी है। इसलिए फिलहाल इसे भारत के खिलाफ बने सैन्य गठबंधन के रूप में देखना सही नहीं होगा।लेकिन अगर भविष्य में बांग्लादेश इसमें शामिल होता है और चारों देशों के बीच वास्तविक सैन्य, खुफिया और रणनीतिक सहयोग विकसित होता है, तब भारत के लिए यह निश्चित रूप से नई रणनीतिक चुनौती होगी

मक्का पैक्ट में बांग्लादेश की संभावित एंट्री को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। इसलिए “भारत तीन तरफ से घिर गया” कहना फिलहाल अतिशयोक्ति होगी। लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों के साथ भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ढाका का किसी नए सैन्य-सुरक्षा गठबंधन के करीब जाना निश्चित तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। असल सवाल यह नहीं है कि बांग्लादेश आज भारत के खिलाफ खड़ा हो गया है या नहीं। सवाल यह है कि अगर दक्षिण एशिया में नए सुरक्षा गठबंधन बनने लगे, तो भारत अपनी कूटनीति, सीमा सुरक्षा और हिंद महासागर की रणनीति को कितनी तेजी से बदलता है।

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