Jharkhand CBI Probes: झारखंड में संवेदनशील और चर्चित मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग लगातार उठती रही है। हाल में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर विपक्ष मुखर है। ऐसे में झारखंड में पहले सीबीआई के पास पहुंचे मामलों और उनके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं।राज्य में सीबीआई कई बड़े और सनसनीखेज मामलों की जांच कर चुकी है। कुछ मामलों में एजेंसी को सफलता मिली, जबकि कुछ मामलों में जांच के नतीजों से पीड़ित परिवार या मृतकों के स्वजन संतुष्ट नहीं हुए।
Jharkhand CBI Probes: बकोरिया मुठभेड़ में पुलिस की जांच पर लगाई मुहर-
पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया गांव में 8 जून 2015 को हुई मुठभेड़ काफी विवादित रही थी। झारखंड पुलिस ने 12 माओवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि मृतकों के स्वजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने भी अपनी जांच में इसे मुठभेड़ का मामला माना और झारखंड पुलिस की जांच पर मुहर लगा दी। हालांकि, मृतकों के स्वजन सीबीआई के निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हुए।
Jharkhand CBI Probes: विनय महतो मौत मामले में क्लोजर रिपोर्ट-
रांची के तुपुदाना स्थित सफायर इंटरनेशनल स्कूल में 5 फरवरी 2016 को छात्र विनय महतो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। रांची पुलिस ने इसे हत्या का मामला माना था और स्कूल की शिक्षिका समेत उनके बच्चों को जेल भेजा था। बाद में वैज्ञानिक जांच के आधार पर उन्हें जमानत मिल गई। विनय के पिता के आग्रह और झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2022 में सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। जून 2026 में सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए मौत को दुर्घटना माना। इसके बाद विनय महतो के स्वजनों ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए हैं।
अंतरिक्ष शनिग्रही की मौत का मामला अब भी लंबित-
रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र में 25 जुलाई 2016 को डीपीएस के छात्र अंतरिक्ष शनिग्रही की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। स्थानीय पुलिस ने इसे दुर्घटना बताया था। छात्र की मां के आग्रह पर हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। सीबीआई ने फरवरी 2021 में प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन अब तक जांच किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है।
बीटेक छात्रा हत्याकांड में मिली बड़ी सफलता-
रांची के सदर थाना क्षेत्र की बूटी बस्ती में 15 दिसंबर 2016 की रात बीटेक की एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव जलाने का मामला सामने आया था। रांची पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई। एजेंसी ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। यह मामला सीबीआई के झारखंड में सबसे सफल अनुसंधानों में गिना जाता है। निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।
साढ़े पांच साल से लापता छात्रा की तलाश भी सीबीआई के पास-
बोकारो के पिंडराजोरा का मामला भी अब सीबीआई के पास पहुंच गया है। करीब साढ़े पांच साल पहले लापता हुई छात्रा की तलाश की जिम्मेदारी सीबीआई को दी गई है। सीबीआई की रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि एजेंसी इस मामले में लापता छात्रा तक पहुंच पाती है या नहीं।
ईडी अधिकारियों से जुड़े दो मामलों की भी जांच-
ईडी अधिकारियों पर कथित मारपीट से जुड़े दो मामलों की जांच भी सीबीआई कर रही है। इनमें एक मामला साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन मामले के गवाह के मुकरने और ईडी अधिकारियों पर मारपीट के आरोप से जुड़ा है। दूसरा मामला सरकारी खाते से करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी के आरोपी के साथ ईडी कार्यालय में मारपीट के आरोप से संबंधित है। दोनों मामलों में सीबीआई की जांच जारी है।
सफलता और सवाल, दोनों का रिकॉर्ड-
झारखंड में सीबीआई के पास पहुंचे मामलों को देखें तो एजेंसी ने कुछ मामलों में अहम सफलता हासिल की है, लेकिन कई मामलों में जांच लंबी चली या उसके निष्कर्ष पर पीड़ित परिवारों ने सवाल उठाए। ऐसे में राज्य में संवेदनशील मामलों की सीबीआई जांच की मांग के बीच एजेंसी के पुराने मामलों का रिकॉर्ड भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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